मेरठ : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की उन सीटों पर विशेष रणनीति बनानी शुरू कर दी है, जहां उसे पिछले चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।
पार्टी का लक्ष्य समाजवादी पार्टी (सपा) के पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की चुनावी बढ़त को चुनौती देना और खोया जनाधार वापस हासिल करना है।
भाजपा संगठन में पीडीए से जुड़ी प्रमुख जातियों के नेताओं को अहम जिम्मेदारियां देकर सामाजिक समीकरण मजबूत करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को किए गए रिकॉर्ड गन्ना भुगतान को भी चुनावी मुद्दे के रूप में प्रमुखता से जनता के बीच ले जाने की योजना बनाई गई है।
मेरठ समेत कई सीटों पर मिली थी हार
विधानसभा चुनाव 2022 में मेरठ जिले की चार सीटों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। सरधना सीट पर संगीत सोम, सिवाल खास से मनिंदरपाल सिंह, मेरठ शहर से कमलदत्त शर्मा और किठौर से सत्यवीर त्यागी चुनाव हार गए थे। अब पार्टी इन सीटों पर दोबारा जीत हासिल करने के लिए संगठन और बूथ स्तर पर रणनीति तैयार कर रही है।
मेरठ के अलावा शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत और मुरादाबाद मंडल के कई विधानसभा क्षेत्रों में भी भाजपा अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी थी। इन क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने और सामाजिक समीकरण साधने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
पीडीए रणनीति के जवाब में सामाजिक संतुलन पर जोर
भाजपा ने पश्चिम क्षेत्र में संगठनात्मक बदलाव करते हुए गुर्जर समाज से आने वाले नवाब सिंह नागर को पश्चिम क्षेत्र का अध्यक्ष बनाया है। वहीं जाट समुदाय के नेता चौधरी देवेंद्र सिंह को किसान मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर किसान वर्ग और पश्चिमी यूपी के सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है।
पार्टी किसानों के बीच सरकार की उपलब्धियों, विशेषकर गन्ना किसानों को किए गए भुगतान और कृषि संबंधी योजनाओं का व्यापक प्रचार करने की तैयारी में है।
रालोद गठबंधन से बढ़ी उम्मीदें
2022 में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में था, जबकि अब वह भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा है। रालोद अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के साथ गठबंधन को भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने लिए राजनीतिक रूप से लाभकारी मान रही है।
हालांकि आगामी विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे का अंतिम निर्णय चुनाव के समय ही होगा, लेकिन दोनों दल संगठनात्मक स्तर पर अपनी-अपनी तैयारियां तेज कर चुके हैं।
रालोद भी संगठन विस्तार में सक्रिय
रालोद भी अपने संगठन को मजबूत करने में जुटा है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता के.सी. त्यागी को संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाया है, जबकि उनके पुत्र अमरीश त्यागी को युवाओं को संगठन से जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी पंचायत चुनावों में भी संगठन को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है।

