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आजम खान और अब्दुल्ला आजम को बड़ा झटका, दो पैन कार्ड मामले में कोर्ट ने बढ़ाई सजा, कोर्ट ने सजा बढ़ाकर 10 साल की

आजम खान और अब्दुल्ला आजम को बड़ा झटका, दो पैन कार्ड मामले में कोर्ट ने बढ़ाई सजा, कोर्ट ने सजा बढ़ाकर 10 साल की

Breaking Tube 1 month ago

जम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को दो पैन कार्ड मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगा है। अदालत ने शनिवार को सुनाए फैसले में आजम खान की सजा सात साल से बढ़ाकर दस साल कर दी, जबकि अब्दुल्ला आजम खान की सात साल की सजा को बरकरार रखा गया।

साथ ही दोनों पर लगाए गए जुर्माने की राशि भी बढ़ा दी गई है। कोर्ट के आदेश के अनुसार आजम खान पर पांच लाख रुपये और अब्दुल्ला आजम खान पर साढ़े तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। दोनों फिलहाल जेल में बंद हैं।

अभियोजन की अपील पर कोर्ट ने बढ़ाई सजा

सरकारी पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सीमा सिंह राणा ने बताया कि नवंबर 2025 में ट्रायल कोर्ट ने पिता-पुत्र को सात-सात साल की कैद और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। फैसले के बाद बचाव पक्ष ने सजा के खिलाफ अपील दायर की थी, जबकि अभियोजन पक्ष ने सजा बढ़ाने की मांग करते हुए एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट का रुख किया। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने शनिवार को अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को सही मानते हुए आजम खान की सजा और जुर्माना दोनों बढ़ा दिए। सरकारी वकील के मुताबिक, संवैधानिक दस्तावेजों में कथित हेरफेर और धोखाधड़ी जैसे मामलों में कठोर सजा जरूरी थी।

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हर धारा में बढ़ाया गया जुर्माना

अदालत ने एफआईआर में दर्ज विभिन्न धाराओं के तहत लगाए गए जुर्माने में भी बढ़ोतरी की है। मामले के शिकायतकर्ता और रामपुर सदर से भाजपा विधायक Akash Saxena ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कानून सबके लिए समान है और फर्जी दस्तावेजों के सहारे रची गई साजिश का अंत हो गया।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2019 में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम खान ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दो अलग-अलग जन्मतिथि वाले पैन कार्ड बनवाए थे। एक पैन कार्ड में जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 दर्ज थी, जबकि दूसरे में 30 सितंबर 1990 लिखी गई थी। रामपुर की अदालत ने 17 नवंबर 2025 को दोनों को दोषी करार देते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई थी। फैसले के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया था। इसके खिलाफ पिता-पुत्र ने सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की थी। मामले में दोनों पक्षों की बहस 6 अप्रैल 2026 को पूरी हुई थी, जिसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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