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महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम पद पर खींचतान तेज,प्रफुल्ल पटेल या सुनेत्रा कौन लेगा अजित पवार की जगह!

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम पद पर खींचतान तेज,प्रफुल्ल पटेल या सुनेत्रा कौन लेगा अजित पवार की जगह!

Breaking Tube 4 months ago

हाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री उजित पवार के निधन के बाद अब उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम होंगी। विधायक दल की मीटिंग के लिए सुनेत्रा शनिवार सुबह मुंबई पहुंच गई हैं।

फिलहाल वे अजित के आधिकारिक आवास देवगिरी में मौजूद हैं। उनके साथ बेटा पार्थ भी है।62 साल की सुनेत्रा फिलहाल महाराष्ट्र विधानसभा के किसी भी सदन की सदस्य नहीं हैं। शनिवार दोपहर 2 बजे NCP के विधायक दल और विधान परिषद सदस्यों की मीटिंग होगी। जहां उन्हें विधायक दल का नेता चुना जाएगा। नाम के ऐलान के बाद उन्हें डिप्टी सीएम बनाया जाएगा। शपथग्रहण शाम 5 बजे होने की संभावना है।सुनेत्रा वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं। उनके डिप्टी सीएम बनने के बाद यह पद खाली हो जाएगा। सूत्रों के मुताबिक अजित के बड़े बेटे पार्थ पवार को राज्यसभा भेजे जाने की तैयारी है। हालांकि पार्टी-परिवार की ओर से इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

शरद पवार ने सुनेत्रा के डिप्टी सीएम बनने पर क्या कहा

अजित के निधन के बाद शरद पवार ने पहली बार सुनेत्रा के शपथग्रहण और NCP के दोनों गुटों के विलय पर बयान दिया है। शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शरद ने कहा- "डिप्टी सीएम पद के लिए सुनेत्रा पवार का नाम दिए जाने की मुझे कोई जानकारी नहीं है। उनकी पार्टी ने फैसला किया होगा। मैंने आज अखबार में देखा।प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे कुछ नाम हैं जिन्होंने कुछ फैसले लेने की पहल की है।

सुनेत्रा की राजनीतिक

2024 के लोकसभा चुनाव तक सुनेत्रा पवार ने राजनीति में लो प्रोफाइल रखा था। उस साल लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपने पति की पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर बारामती से चुनाव लड़ा, लेकिन अपनी ननद और मौजूदा NCP (SP) MP सुप्रिया सुले से हार गईं थीं। इसके बाद सुनेत्रा राज्यसभा के लिए सांसद चुनी गईं।

NCP क्या एक होगी?

अजित पवार के निधन के बाद दो सबसे बड़े सवाल हैं। पहला कि उनकी पार्टी NCP कौन संभालेगा और दूसरा कि क्या तीन साल पहले अलग हुए अजित पवार गुट और शरद पवार गुट अब फिर एक हो जाएंगे। दूसरे सवाल का जवाब है- हां। सोर्सेज के मुताबिक, दोनों पार्टियों के विलय की प्रोसेस पूरी हो चुकी है, अजित पवार ने खुद इसका इसका रोडमैप बनाया था। वे लगातार इस मसले पर मीटिंग कर रहे थे। उनके निधन के बाद भी दो बार मीटिंग हो चुकी है। अब 9 फरवरी को जिला परिषद चुनाव का रिजल्ट आने के बाद दोनों गुटों के विलय की घोषणा हो सकती है।

पार्टी की कमान पर खींचतान तेज

शरद गुट में हमारे सोर्स दावा करते हैं कि दोनों गुटों के एक होने, अजित पवार के महाराष्ट्र में पार्टी संभालने और सुप्रिया सुले के दिल्ली में रहने से प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे लीडर साइडलाइन हो जाते। प्रफुल्ल पटेल शरद पवार के सबसे करीबियों में शामिल थे। पार्टी टूटने से पहले शरद पवार ने उन्हें अजित पवार पर तवज्जो देकर पार्टी का वर्किंग प्रेसिडेंट बनाया था। सोर्स आगे कहते हैं, 'प्रफुल्ल पटेल की BJP से करीबी है। अजित पवार को भी ये बात पता थी। उनके निधन के बाद अब शरद पवार खुद कमान संभालना चाहते हैं ताकि पार्टी पर फैमिली का होल्ड रहे और पहले जैसी समझ बनी रहे। शरद पवार अपने वफादार नेताओं जैसे जयंत पाटिल और शशिकांत शिंदे को राज्य की राजनीति में बिठाना चाहते हैं। हालांकि, प्रफुल्ल पटेल को किनारे लगाना आसान नहीं है। पार्टी के वर्किंग प्रेसिडेंट होने के नाते वे खुद को उत्तराधिकारी मान रहे हैं। प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और धनंजय मुंडे चाहते हैं कि पार्टी पर उनका होल्ड रहे।'
सोर्स के मुताबिक, प्रफुल्ल पटेल BJP को समझाने में लगे हैं कि वे ही अजित पवार को लेकर आए थे। ऐसे में उनके हाथ में पार्टी रहने पर ही BJP का फायदा है।

विलय से BJP को भी फायदा

सोर्स दावा करते हैं कि अजित पवार को BJP हाईकमान से हरी झंडी मिल गई थी। BJP भी चाहती है कि दोनों पार्टियां एक हो जाएं, इसलिए वो इसमें अडंगा नहीं लगा रही। महाराष्ट्र में BJP की सरकार मजबूत है, लेकिन लोकसभा में उसे शरद पवार गुट के 8 सांसदों की जरूरत है। अजित पवार के पास सिर्फ एक सांसद है। अगर NCP एक हो जाती है, तो केंद्र में BJP को 9 सांसदों का समर्थन मिलेगा, जो बड़ा आंकड़ा है। सोर्स के मुताबिक, BJP शरद पवार के साथ काम करने में सहज नहीं है। इसीलिए एक प्लान तैयार किया गया था। शरद पवार ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि वे मार्च में राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद राजनीति में एक्टिव नहीं रहेंगे। योजना यही थी कि शरद पवार सम्मानजनक तरीके से बाहर निकल जाएं, फिर सुप्रिया सुले दिल्ली और अजित पवार राज्य संभाल लें। इससे NCP के दोनों गुटों और BJP का भी फायदा था।

INPUT-ANANYA MISHRA

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