Tripartite Struggle 8वीं और 9वीं शताब्दी में पाल, गुर्जर-प्रतिहार और राष्ट्रकूट राजवंशों के बीच कन्नौज पर प्रभुत्व स्थापित करने के लिए हुआ एक महत्वपूर्ण संघर्ष था।
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- त्रिपक्षीय संघर्ष को कन्नौज त्रिकोणीय युद्ध भी कहा जाता है।
- यह संघर्ष मुख्य रूप से 8वीं और 9वीं शताब्दी में हुआ।
- इसमें पाल, गुर्जर-प्रतिहार और राष्ट्रकूट प्रमुख शक्तियाँ थीं।
- मुख्य उद्देश्य कन्नौज पर नियंत्रण स्थापित करना था।
- कन्नौज राजनीतिक प्रतिष्ठा और व्यापारिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था।
- Dharmapala ने पाल साम्राज्य का विस्तार किया।
- Vatsaraja ने प्रारंभिक संघर्ष में धर्मपाल को हराया।
- Dhruva Dharavarsha ने बाद में वत्सराज को पराजित किया।
- ध्रुव के लौटने के बाद धर्मपाल ने पुनः कन्नौज पर कब्जा किया।
- Nagabhata II ने धर्मपाल को हराकर कन्नौज पर नियंत्रण किया।
- Govinda III ने भी कन्नौज पर आक्रमण किया।
- अंततः प्रतिहार उत्तरी भारत की प्रमुख शक्ति बनकर उभरे।
- इस संघर्ष से कला, स्थापत्य और साहित्य का विकास हुआ।
- राष्ट्रकूटों ने कन्नड़ साहित्य और पालों ने प्रारंभिक बंगाली संस्कृति को बढ़ावा दिया।
- लंबे संघर्ष ने तीनों साम्राज्यों को कमजोर कर दिया।

