नई दिल्ली : केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने स्पष्ट किया है कि, 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को प्रोत्साहन देने के लिए कोई अलग या चरणबद्ध राष्ट्रीय नीति तैयार नहीं की गई है।मंत्रालय ने यह भी कहा कि, फ्लेक्स-फ्यूल या इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने संबंधी कोई अलग अध्ययन भी नहीं कराया गया है।
यह जानकारी प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा जारी विज्ञप्ति में दी गई।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है, जब मंत्रालय ने ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई-ऑटो योजना) की प्रगति का ब्यौरा साझा किया। मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत पूरे देश में अब तक 44,326 करोड़ रुपये का संचयी निवेश आकर्षित हुआ है और 2019-20 के आधार वर्ष की तुलना में 52,414 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बिक्री दर्ज की गई है। इसके साथ ही 67,820 रोजगार भी सृजित हुए हैं।विज्ञप्ति के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक कुल 2,386.36 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन वितरित किए जा चुके हैं।
स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने पर जोर
पीएलआई-ऑटो योजना के तहत प्रोत्साहन प्राप्त करने के लिए कंपनियों को कम से कम 50 प्रतिशत घरेलू मूल्य संवर्धन (डीवीए) सुनिश्चित करना अनिवार्य है। इसका उद्देश्य उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (एएटी) उत्पादों के स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देना है।मंत्रालय ने बताया कि 28 जुलाई 2026 तक 18 आवेदकों को 155 एएटी उत्पादों और उनके विभिन्न संस्करणों के लिए डीवीए प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं।
एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम में संतुलित दृष्टिकोण
सरकार ने कहा कि, एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम के तहत जल संरक्षण, खाद्य सुरक्षा और किसानों के हितों को नीति के केंद्र में रखा गया है। राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत इथेनॉल का उत्पादन कई स्वीकृत कच्चे माल से किया जा रहा है, जिनमें गन्ना आधारित स्रोत, मक्का, क्षतिग्रस्त खाद्यान्न, टूटा चावल, मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त खाद्यान्न और राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति (एनबीसीसी) द्वारा अनुमोदित अधिशेष खाद्यान्न शामिल हैं।
मक्का जैसे कम पानी वाले फीडस्टॉक को बढ़ावा
मंत्रालय ने कहा कि सरकार मक्का जैसे कम पानी की आवश्यकता वाले फीडस्टॉक के उपयोग को बढ़ावा दे रही है।कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 2024 में गठित एक विशेषज्ञ समिति ने इथेनॉल उत्पादन में उपयोग होने वाली विभिन्न फसलों की जल आवश्यकता का अध्ययन किया था और उसकी सिफारिशों को कार्यक्रम के क्रियान्वयन में शामिल किया जा रहा है।
सूक्ष्म सिंचाई और जल संरक्षण पर विशेष जोर
जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' घटक के तहत सूक्ष्म सिंचाई और ड्रिप सिंचाई को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मंत्रालय ने बताया कि कई चीनी मिलें किसानों को जल-संरक्षण आधारित खेती की तकनीक अपनाने के लिए भी प्रेरित कर रही हैं। इसके अलावा, इंसीनेरेशन बॉयलर वाली शीरा-आधारित डिस्टिलरी और अनाज आधारित डिस्टिलरी इकाइयों को शून्य तरल अपशिष्ट (जेडएलडी) प्रणाली के तहत संचालित करना अनिवार्य है, जिसमें प्रसंस्करण जल का पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग किया जाता है तथा तरल अपशिष्ट का बाहरी उत्सर्जन पूरी तरह समाप्त किया जाता है।

