नई दिल्ली : भारत के चीनी उद्योग के अनुसार, चालू सीजन में फरवरी तक चीनी की खपत आवंटन से 60,000 टन अधिक थी, लेकिन मार्च में इसमें 2 लाख टन की गिरावट आई और अप्रैल में भी इतनी ही कमी आने की संभावना है।
इसका मुख्य कारण ठंडा मौसम और एलपीजी सिलेंडरों की कमी बताया गया है। चीनी क्षेत्र को विनियमित करने वाले खाद्य मंत्रालय ने 2025-26 सत्र के पहले पांच महीनों (अक्टूबर-फरवरी) में घरेलू बिक्री के लिए मिलों को 110.5 लाख टन चीनी आवंटित की, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 114.5 लाख टन से 3.5 प्रतिशत कम है। मंत्रालय ने मार्च में 22.5 लाख टन और अप्रैल में 23 लाख टन चीनी जारी की, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि से 0.5 लाख टन कम है।
मंत्रालय ने मार्च के लिए 22.5 लाख टन और अप्रैल के लिए 23 लाख टन चीनी जारी की, जो पिछले साल की तुलना में प्रत्येक माह 0.5 लाख टन कम है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने 'द हिंदू बिजनेसलाइन' को बताया कि, अक्टूबर से फरवरी के बीच मिलों की बिक्री आवंटित कोटा से 60,000 टन अधिक रही।उन्होंने कहा कि, पूरे सीजन में चीनी की खपत 2024-25 के 281 लाख टन से घटकर 2025-26 में 277 लाख टन रह सकती है। खाद्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पूरे सीजन के लिए घरेलू बिक्री कोटा 275.5 लाख टन तय किया गया है।बल्लानी ने यह भी बताया कि, इस सीजन में कुल चीनी उत्पादन लगभग 320 लाख टन रहने की संभावना है, जो पहले के अनुमान 324 लाख टन से थोड़ा कम है। एथेनॉल उत्पादन के लिए 34-35 लाख टन चीनी के उपयोग के बाद शुद्ध उत्पादन 285-286 लाख टन रहने का अनुमान है।
खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि सरकार को इस सीजन में 320 से 325 लाख टन के बीच उत्पादन की उम्मीद है, जो शुरुआती अनुमान 330 लाख टन से कम है। उन्होंने बताया कि करीब 35 लाख टन चीनी एथेनॉल के लिए इस्तेमाल हो सकती है, जिससे शुद्ध उत्पादन 285-290 लाख टन रहेगा।चीनी निर्यात पर रोक लगाने की योजना के बारे में उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार ने 15 लाख टन से अधिक चीनी निर्यात को मंजूरी दी है, लेकिन पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण कीमतों में थोड़ा सुधार हुआ है, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिला है। हालांकि, पूरी स्वीकृत मात्रा का निर्यात होना चुनौतीपूर्ण रहेगा।उन्होंने स्पष्ट किया कि, जो चीनी निर्यात नहीं होगी, वह देश में ही रहेगी और अंतिम भंडार (क्लोजिंग स्टॉक) बढ़ाएगी। इससे अगले वर्ष एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने में अधिक लचीलापन मिल सकता है।

