गोपालगंज : गोपालगंज जिले में बंद पड़ी सासामुसा चीनी मिल को लेकर जन सुराज पार्टी ने आंदोलन तेज कर दिया है पार्टी ने कुचायकोट प्रखंड मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन आयोजित कर किसानों, मजदूरों और अन्य संबंधित पक्षों के करीब 77 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान की मांग उठाई।
साथ ही मिल परिसर में कथित अवैध कटाई की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई।धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व जन सुराज पार्टी की महिला जिलाध्यक्ष रीना देवी ने किया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश उपाध्यक्ष योगेंद्र शर्मा ने की।
किसानों और मजदूरों के बकाए का उठाया मुद्दा…
धरना सभा को संबोधित करते हुए पार्टी नेताओं ने दावा किया कि, सासामुसा चीनी मिल पर क्षेत्र के गन्ना किसानों का करीब 65 करोड़ रुपये बकाया है, जिसका भुगतान लंबे समय से नहीं हुआ है। वक्ताओं के अनुसार, मिल के कर्मचारियों, मजदूरों और अन्य संबंधित एजेंसियों का भी लगभग 12 करोड़ रुपये बकाया है। पार्टी नेताओं ने इन सभी लंबित भुगतानों को जल्द जारी करने की मांग की।
मिल परिसर में कथित अवैध कटाई का आरोप…
धरने के दौरान जन सुराज पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि, स्थानीय प्रशासन की कथित मिलीभगत से मिल के कीमती कल-पुर्जों को अवैध रूप से कबाड़ के रूप में बेचा जा रहा है। उनका कहना है कि यदि ऐसा जारी रहा तो किसानों और कर्मचारियों के बकाया भुगतान की संभावना और कमजोर हो जाएगी। हालांकि, इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राज्यपाल के नाम सौंपा सात सूत्री ज्ञापन…
प्रदर्शन के दौरान पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय प्रशासन के माध्यम से राज्यपाल के नाम सात सूत्री ज्ञापन सौंपा। इसमें प्रमुख मांगें शामिल हैं; मिल परिसर में कथित अवैध कटाई की जांच कर दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए।सासामुसा चीनी मिल को दोबारा शुरू किया जाए। किसानों, मजदूरों और अन्य एजेंसियों के 77 करोड़ रुपये बकाया का शीघ्र भुगतान कराया जाए। सासामुसा रेलवे स्टेशन पर प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित किया जाए।रसोई गैस की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण किया जाए। किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण माफ किए जाएं। स्थानीय बाजार में सार्वजनिक शौचालय और बेहतर जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए।जन सुराज पार्टी के नेताओं ने कहा कि यदि सरकार और प्रशासन ने जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

