नई दिल्ली: एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर इंजन को नुकसान, माइलेज में कमी और अन्य तकनीकी समस्याओं संबंधी चिंताओं के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि देश का एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम व्यापक वैज्ञानिक परीक्षणों और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम मानकों पर आधारित है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि, E20 पेट्रोल को लागू करने से पहले विभिन्न संस्थानों द्वारा विस्तृत परीक्षण किए गए थे और अधिकांश मामलों में कोई गंभीर तकनीकी समस्या सामने नहीं आई। हालांकि, सरकार की ओर से सफाई दिए जाने के बावजूद सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल को लेकर आशंकाएं और बहस जारी है। कई पोस्टों में दावा किया जा रहा है कि, एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से इंजन के पुर्जों में जंग लगती है, माइलेज कम हो जाता है और गन्ने से बने एथेनॉल को सीधे पेट्रोल में मिलाया जा रहा है।
ARAI सहित कई संस्थानों ने किए थे परीक्षण…
पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि, वर्ष 2014 में ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (देहरादून), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और इंडियन ऑयल ने संयुक्त रूप से E20 पेट्रोल के प्रभावों का अध्ययन किया था। इन परीक्षणों में वाहनों की सामग्री अनुकूलता (मैटेरियल कम्पैटिबिलिटी) और उत्सर्जन प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया।सरकार ने फरवरी 2023 में औपचारिक रूप से E20 पेट्रोल लॉन्च किया था और दिसंबर 2025 तक देश में 19.99 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया गया।
40 हजार किलोमीटर तक किए गए फील्ड ट्रायल…
मंत्रालय के अनुसार, परीक्षणों के दौरान कारों पर 40,000 किलोमीटर और दोपहिया वाहनों पर 20,000 किलोमीटर तक फील्ड ट्रायल किए गए। इन परीक्षणों में ड्राइविंग क्षमता, स्टार्ट होने की क्षमता, धातु और प्लास्टिक के पुर्जों की अनुकूलता जैसे अधिकांश मानकों पर कोई महत्वपूर्ण नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया।मंत्रालय ने यह भी स्वीकार किया कि, सामान्य पेट्रोल की तुलना में 10 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर चलने वाले वाहनों में माइलेज में केवल मामूली कमी देखी गई।
उच्च ऑक्टेन क्षमता वाला ईंधन है एथेनॉल…
सरकार ने कहा कि, एथेनॉल का ऑक्टेन नंबर काफी अधिक होता है, जिससे यह उच्च प्रदर्शन वाले आंतरिक दहन (इंटरनल कंबशन) इंजनों के लिए उपयुक्त ईंधन बन जाता है। मंत्रालय के अनुसार, बेहतर एंटी-नॉक क्षमता, अधिक शक्ति और बेहतर कूलिंग प्रभाव के कारण एथेनॉल आधारित ईंधन का उपयोग लंबे समय से स्पोर्ट्स कारों में भी किया जाता रहा है।
भारत की नीति वैश्विक मानकों के अनुरूप…
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि भारत का एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम किसी प्रकार का प्रयोग नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है। मंत्रालय ने बताया कि जापान, कनाडा और अमेरिका में 10 प्रतिशत तथा ब्राजील में 27 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग पहले से किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से अब तक 310 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात कम हुआ है। इसके साथ ही किसानों को 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है और देश को 1.9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है।
विपक्ष ने उठाए सवाल…
इस बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर कहा कि वह इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि, सरकार देश को “प्रयोगशाला” बना रही है और लोगों पर एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल थोप रही है। केजरीवाल ने दावा किया कि, E20 पेट्रोल के कारण वाहनों में खराबी आ रही है, पुर्जे प्रभावित हो रहे हैं और माइलेज कम हो रहा है। उन्होंने लोगों से भी सुझाव मांगे कि प्रधानमंत्री को लिखे जाने वाले पत्र में किन मुद्दों को शामिल किया जाए।वहीं, राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने भी सरकार की अनिवार्य E20 नीति का विरोध करते हुए सोशल मीडिया पर प्रदर्शन का आह्वान किया। उन्होंने मांग की कि सरकार अनिवार्य एथेनॉल मिश्रण की नीति समाप्त करे और उपभोक्ताओं को अपनी पसंद का ईंधन चुनने का विकल्प दे।

