बेंगलुरु : कांग्रेस विधान परिषद सदस्य दिनेश गूली गौड़ा ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से आग्रह किया है कि, दक्षिण कर्नाटक की उन चीनी मिलों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, जो गन्ना किसानों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने के सरकारी निर्देशों का पालन करने से मना कर रही हैं।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार, चीनी मंत्री शिवानंद पाटिल और मुख्य सचिव शालिनी राजनीश को लिखे पत्र में गौड़ा ने कहा कि, राज्य सरकार ने किसानों के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए पेराई सत्र 2025-26 के दौरान गन्ना किसानों को 100 रुपये प्रति टन का प्रोत्साहन देने की घोषणा की थी। लेकिन राज्य की करीब 80 चीनी मिलों में से सात मिलें न केवल राज्य सरकार के अधिकार को चुनौती दे रही हैं, बल्कि प्रोत्साहन राशि के भुगतान के मामले में प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भी अड़ंगा डाल रही हैं।
उत्तर कर्नाटक की 73 मिलों ने सरकारी निर्देशों का पालन करते हुए किसानों को समय पर भुगतान किया है, जबकि मंडया, मैसूरु, हासन और चामराजनगर जिलों की सात प्रमुख चीनी मिलों ने सरकारी आदेश को अदालत में चुनौती दे दी है। इस सत्र में पूरे राज्य में 576.47 लाख टन गन्ने की पेराई हुई, जिसमें उत्तर कर्नाटक के किसानों को 100 रुपये प्रति टन मिले, जिसमें 50 रुपये सरकार की ओर से और 50 रुपये मिल की ओर से शामिल थे। लेकिन दक्षिण कर्नाटक की चीनी मिलें सरकारी आदेश का विरोध कर रही हैं।
द हिंदू में प्रकाशित खबर के अनुसार, गौड़ा ने आरोप लगाया कि, सरकार अपने हिस्से के 50 रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने को तैयार है, लेकिन ये मिलें किसानों की सूची और उनके बैंक विवरण देने से इनकार कर रही हैं, जिससे प्रशासनिक काम में बाधा आ रही है। उन्होंने माना कि कानूनी रास्ता अपनाना उनका अधिकार है, लेकिन साथ ही आरोप लगाया कि दक्षिण कर्नाटक की ये मिलें जिला प्रशासनों के साथ सहयोग न करके किसानों का उचित भुगतान जानबूझकर रोक रही हैं। मैसूरु, मंडया, हासन और चामराजनगर जिलों के उपायुक्तों के दबाव के बावजूद मिल मालिक नहीं मान रहे और सरकार को पहले ही स्थिति की गंभीरता बताते हुए सीधे किसानों के खातों में पैसे भेजने की अनुमति माँगी जा चुकी है।
चीनी मिलों का लाइसेंस रद्द करने की माँग…
गौड़ा ने सरकार से आग्रह किया है कि, यदि ये सात चीनी मिलें सरकारी निर्देशों का पालन नहीं करतीं, तो आगामी सत्र के लिए उनके पेराई लाइसेंस नवीनीकृत न किए जाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को उच्च न्यायालय में महाधिवक्ता के जरिए मजबूती से पक्ष रखना चाहिए और चीनी मिलों द्वारा प्राप्त स्थगन आदेश को रद्द कराना चाहिए।
इसके अलावा गौड़ा ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से आग्रह किया कि मानसून आने से पहले इस मामले में एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई जाए और मिल मालिकों को स्पष्ट चेतावनी दी जाए कि यदि वे इसी तरह नियमों का उल्लंघन करते रहे तो सरकार उनकी मिलें अपने हाथ में ले सकती है। उन्होंने कहा कि हमारे जैसे कृषि प्रधान राज्य में किसानों के हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इसलिए वे इन नियम उल्लंघन करने वाली मिलों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई की माँग करते हैं।

