Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
किसान नेताओं ने एथेनॉल नीति का किया समर्थन, शिवराज सिंह चौहान से सीधे लाभ और उचित मूल्य सुनिश्चित करने की मांग

किसान नेताओं ने एथेनॉल नीति का किया समर्थन, शिवराज सिंह चौहान से सीधे लाभ और उचित मूल्य सुनिश्चित करने की मांग

ChiniMandi Hindi 1 week ago

ई दिल्ली: अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति (एआईकेसीसी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की।

बैठक में किसान नेताओं ने कहा कि, एथेनॉल कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ा अवसर है, लेकिन इसका लाभ तभी होगा जब नीति किसान-केंद्रित हो और फसलों का उचित मूल्य सीधे किसानों तक पहुंचे।कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, शिवराज सिंह चौहान ने किसान नेताओं के सुझावों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि सरकार एथेनॉल संबंधी किसानों के विचारों पर गंभीरता से विचार करेगी। उन्होंने कहा कि, कृषि भवन के दरवाजे हमेशा किसानों के लिए खुले हैं।

देशभर के किसान नेताओं ने एथेनॉल पर खुलकर रखी राय

बैठक में पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु सहित विभिन्न राज्यों के किसान प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चा का केंद्र एथेनॉल, किसानों की आय, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), कृषि बाजार और राष्ट्रीय कृषि नीति रहा।किसानों ने स्पष्ट रूप से एथेनॉल नीति का समर्थन किया, लेकिन यह भी कहा कि इस कार्यक्रम का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचना चाहिए, न कि केवल कंपनियों या बिचौलियों तक सीमित रहना चाहिए।

मंडी से आगे ऊर्जा बाजार तक पहुंचेगी किसानों की उपज

किसान नेताओं ने कहा कि, एथेनॉल नीति के माध्यम से कृषि उपज केवल मंडियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पेट्रोल पंपों और ऊर्जा बाजार तक भी पहुंचेगी, जिससे किसानों के लिए एक नया और मजबूत बाजार तैयार होगा।उन्होंने कहा कि गन्ना, मक्का, धान और अन्य स्वीकृत फीडस्टॉक से एथेनॉल उत्पादन बढ़ने पर किसानों को अधिक खरीदार मिलेंगे और फसल के खराब होने या भंडारण से जुड़ी समस्याएं भी कम होंगी।

उचित मूल्य मिले तभी सफल होगी एथेनॉल नीति

किसानों ने कहा कि चाहे मक्का हो या गन्ना, एथेनॉल उत्पादन में उपयोग होने वाली हर फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाना चाहिए। किसान प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि, वे चाहते हैं कि एथेनॉल नीति कृषि के लिए नई संभावनाएं खोले, न कि किसानों के लिए नई चिंताएं पैदा करे।

सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारी रोकने की मांग

बैठक में कई किसान नेताओं ने कहा कि, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर एथेनॉल के बारे में गलत जानकारी फैलाई जा रही है, जिसमें दावा किया जाता है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन वाहनों को नुकसान पहुंचाता है या किसानों को घाटा होता है।उन्होंने मांग की कि, कृषि मंत्रालय और किसान संगठन मिलकर स्पष्ट रूप से यह जानकारी दें कि किन फसलों को एथेनॉल से लाभ होगा और पानी की अधिक खपत वाली फसलों से सूखा-रोधी फसलों की ओर परिवर्तन कैसे संभव है।किसानों ने सुझाव दिया कि रील, लघु वीडियो और गांव स्तर की बैठकों के माध्यम से युवाओं तक इथेनॉल की सही जानकारी पहुंचाई जाए।

किसानों को सबसे बड़ा लाभ मिले, यही सरकार की प्राथमिकता: शिवराज

शिवराज सिंह चौहान ने बैठक के दौरान किसानों से समय-समय पर सवाल पूछकर जमीनी स्थिति को समझने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि, केंद्र सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि एथेनॉल कार्यक्रम का लाभ खेत से लेकर ईंधन टैंक तक पूरी मूल्य श्रृंखला में पहुंचे, लेकिन इसका सबसे बड़ा हिस्सा किसानों को मिलना चाहिए।उन्होंने कहा कि, एथेनॉल देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर बनाएगा। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी फसल या किसी भी राज्य के साथ अन्याय न हो।

मक्का, धान और गन्ने के हितों का संतुलन बनाएगी सरकार

बैठक में चौहान ने आश्वासन दिया कि मक्का, धान, गन्ना और अन्य फीडस्टॉक की कीमतों तथा मांग के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए नीति की समीक्षा की जाएगी। विशेष रूप से मक्का उत्पादक किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी।उन्होंने कहा कि, एथेनॉल से जुड़े नकारात्मक प्रचार का जवाब वैज्ञानिक अध्ययनों और तकनीकी रिपोर्टों के आधार पर दिया जाएगा तथा किसानों के साथ मिलकर तथ्यों पर आधारित संवाद चलाया जाएगा।

सरकार और किसान संगठन नीति निर्माण में साझेदार

बैठक के अंत में एआईकेसीसी के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे गांव-गांव जाकर एथेनॉल से जुड़ी भ्रांतियों को तथ्यों और जमीनी अनुभवों के आधार पर दूर करेंगे तथा किसान हित में नीति निर्माण प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे।शिवराज सिंह चौहान ने भी स्पष्ट संदेश दिया कि, किसान संगठन सरकार के विरोधी नहीं, बल्कि नीति निर्माण में उसके साझेदार हैं। उन्होंने कहा कि, अब आवश्यकता ऐसी रूपरेखा तैयार करने की है जो किसानों, राष्ट्र और ऊर्जा क्षेत्र-तीनों को समान रूप से मजबूत करे।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: ChiniMandi Hindi