पुणे: महाराष्ट्र में वर्ष 2026-27 के गन्ना पेराई सीजन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं, लेकिन 15 अक्टूबर से पेराई शुरू होने की संभावना धुंधली नजर आ रही है। गन्ना कटाई मजदूरों की उपलब्धता, दशहरा-दिवाली के त्योहार और इसी अवधि में वापसी की बारिश की संभावना को देखते हुए पेराई सीजन के तय समय पर शुरू होने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
दशहरा और दिवाली के त्योहारों के कारण बीड, धाराशिव और सोलापुर क्षेत्रों से आने वाले गन्ना कटाई मजदूर इस अवधि में गन्ना कटाई के लिए उपलब्ध नहीं हो पाते हैं।
इस वर्ष चीनी मिलों को पेराई लाइसेंस देने के नियम भी सख्त किए गए हैं। पिछले सीजन के गन्ने की 100 प्रतिशत उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) राशि का भुगतान किए बिना मिलों को पेराई लाइसेंस नहीं दिया जाएगा।पेराई लाइसेंस के लिए आवेदन प्रक्रिया 1 सितंबर से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलेगी। केंद्र सरकार के निर्देश के अनुसार महाराष्ट्र में चीनी मिलों का पेराई सीजन 15 अक्टूबर से शुरू करने की योजना बनाई गई है। हालांकि, गन्ना कटाई मजदूरों की उपलब्धता और त्योहारों के साथ वापसी की बारिश की स्थिति को देखते हुए इस तारीख से पेराई शुरू होना मुश्किल माना जा रहा है।इस वर्ष पेराई सीजन वास्तव में कब शुरू किया जाए, इसका अंतिम फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में होने वाली बैठक के बाद लिया जाएगा।
चीनी आयुक्त डॉ. संजय कोलते ने चेतावनी दी है कि, बिना लाइसेंस पेराई शुरू करने वाली चीनी मिलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने वाली मिलों पर भी कार्रवाई की जाएगी।वर्तमान में दिवाली से पहले ही चीनी का भाव करीब 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए केंद्र के निर्देश के अनुसार 15 अक्टूबर से पेराई सीजन शुरू करने की योजना बनाई गई है। हालांकि, राज्य के 20 से अधिक जिलों में औसत से कम बारिश होने के कारण इस वर्ष चीनी उत्पादन में करीब 2 लाख टन की कमी आने का अनुमान है।
शत प्रतिशत एफआरपी भुगतान की शर्त होगी निर्णायक
इस वर्ष पेराई लाइसेंस प्राप्त करने के लिए चीनी मिलों को पिछले सीजन की FRP पूरी तरह चुकाने का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।आवेदन की समयसीमा चूकना, बिना लाइसेंस पेराई शुरू करना या लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करना चीनी मिलों के लिए भारी पड़ सकता है।

