कोल्हापुर : गन्ना उत्पादक किसानों को एक ही स्थान पर गन्ने का वजन और रिकवरी (शुगर रिकवरी प्रतिशत) की जानकारी उपलब्ध कराने तथा चीनी उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से कोल्हापुर जिले में किसानों के आर्थिक सहयोग से गन्ना रिकवरी मापने वाली प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी।
यह महाराष्ट्र का अपनी तरह का पहला उपक्रम होगा। इस परियोजना के लिए आवश्यक धनराशि जनसहयोग (लोकवर्गणी) के माध्यम से जुटाई जाएगी। आंदोलन अंकुश संगठन के नेता धनाजी चुडमुंगे ने इस महीने के अंत तक निधि संग्रह पूरा करने का आह्वान किया है।
रविवार (2 अगस्त) को किसान वजनकांटे पर आयोजित संगठन की बैठक में धनाजी चुडमुंगे ने कहा कि, कृष्णा, वारणा, पंचगंगा और दूधगंगा नदी के किनारे का क्षेत्र देश में सर्वाधिक गन्ना रिकवरी देने वाले क्षेत्रों में माना जाता है। लेकिन चीनी मिलों की औसत रिकवरी के आधार पर लागू एफआरपी प्रणाली के बाद कई मिलों ने औसत रिकवरी कम दिखानी शुरू कर दी।उनका दावा है कि, इसी कारण पिछले दस वर्षों से गन्ने के दाम लगभग 2,500 से 3,000 रुपये प्रति टन के आसपास ही बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि, चीनी मिलों द्वारा घोषित रिकवरी सही है या नहीं, इसकी स्वतंत्र जांच के लिए सरकार के पास कोई अलग व्यवस्था नहीं है। इसलिए संगठन स्वतंत्र गन्ना रिकवरी प्रयोगशाला स्थापित कर वास्तविक स्थिति किसानों के सामने लाएगा। उनका मानना है कि, इससे चीनी उद्योग में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को उचित जानकारी मिलेगी।
'वीएसआई' मान्यता प्राप्त आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे
प्रयोगशाला में रिकवरी माप को तकनीकी रूप से पूरी तरह विश्वसनीय बनाने के लिए अत्याधुनिक डिजिटल पोलारोमीटर लगाया जाएगा। इसके लिए वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट (VSI) से मान्यता प्राप्त आधुनिक उपकरण खरीदे जाएंगे।हालांकि, इन उपकरणों की लागत अधिक है, लेकिन संगठन ने जनसहयोग के माध्यम से पूरी राशि जुटाने का निर्णय लिया है।

