पुणे : स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के संस्थापक-अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने आरोप लगाया की, महाराष्ट्र के कई चीनी मिलों द्वारा किसानों को किये गए एफआरपी का भुगतान की कथित रूप से गलत जानकारी चीनी आयुक्तालय को भेजी गई है।
राज्य में अब भी लगभग 3,500 करोड़ रुपये की एफआरपी राशि बकाया है। उन्होंने चीनी आयुक्त डॉ. संजय कोलते से मुलाकात कर मिल-वार तत्काल जांच कर संबंधित मिलों पर जब्ती की कार्रवाई करने की मांग की। बुधवार को चीनी आयुक्तालय में हुई इस बैठक में चीनी संचालक (प्रशासन) डॉ. केदारी जाधव, सह-संचालक (वित्त) सचिन रावल और किसान भी उपस्थित थे। इस दौरान शेट्टी ने चीनी उद्योग से जुड़े कई लंबित मुद्दों पर चर्चा करते हुए उनके शीघ्र समाधान की मांग की।
एफआरपी बकाया के मुद्दे पर शेट्टी ने जोर देकर कहा कि, बकाया भुगतान में विफल चीनी मिलों के खिलाफ राजस्व वसूली प्रमाणपत्र (आरआरसी) के तहत जब्ती की कार्रवाई शुरू की जाए। उन्होंने बताया कि, राज्य में 2025-26 का गन्ना पेराई सत्र समाप्त हुए करीब ढाई महीने हो चुके हैं, फिर भी किसानों को पूरी राशि नहीं मिली है, जिससे वे आर्थिक संकट में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि, इस वर्ष बाजार में चीनी और उसके उप-उत्पादों को अच्छे दाम मिले हैं, इसके बावजूद मिल मालिकों ने केंद्र सरकार से अनुदान या पैकेज प्राप्त करने के लिए अंतिम डेढ़ महीने में पेराई किए गए गन्ने का एफआरपी भुगतान नहीं किया। इसका असर राज्य के लाखों गन्ना उत्पादक किसानों पर पड़ा है।
शेट्टी ने राज्य सरकार पर भी आरोप लगाया कि, वह चीनी मिल मालिकों के पक्ष में झुकी हुई है और कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता की जा रही है। इस पर चीनी आयुक्त डॉ. संजय कोलते ने आश्वासन दिया कि, अगले एक सप्ताह में राज्य की सभी चीनी मिलों की एफआरपी बकाया की वास्तविक स्थिति की जांच की जाएगी और यदि किसी ने गलत जानकारी दी है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

