कुआलालंपुर: मलेशिया सरकार 1 जून से B15 बायोडीजल ईंधन लागू करने जा रही है।इस ईंधन में 15 प्रतिशत पाम ऑयल आधारित बायोडीजल मिलाया जाएगा। सरकार का कहना है कि, इस कदम का उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और कम-कार्बन अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना है।प्लांटेशन और कमोडिटीज मंत्री नोरैनी अहमद के अनुसार, मलेशिया हर साल लगभग 2 करोड़ टन पाम ऑयल का उत्पादन करता है, जिसमें से करीब 1.6 करोड़ टन निर्यात किया जाता है।
B15 कार्यक्रम के लिए लगभग 8 लाख टन फीडस्टॉक की जरूरत होगी। सरकार का मानना है कि, इससे देश के पाम ऑयल निर्यात पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
सरकार ने बताया कि, उद्योग जगत से चर्चा के बाद B15 मिश्रण को सबसे व्यावहारिक विकल्प माना गया है। इसे लागू करने के लिए मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होगी और इसे तुरंत लागू किया जा सकता है। वहीं सरावाक, लाबुआन और लंगकावी जैसे क्षेत्रों में पहले से ही B20 बायोडीजल कार्यक्रम चल रहा है। B20 कार्यक्रम के विस्तार के लिए सरकार पहले ही 4.2 करोड़ रिंगिट इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड पर खर्च कर चुकी है। इसके अलावा ईंधन वितरण टर्मिनलों के आधुनिकीकरण के लिए सरकार ने 5.6 करोड़ रिंगिट अतिरिक्त बजट की मांग की है, खासकर क्लांग वैली क्षेत्र में।
मलेशिया का राष्ट्रीय बायोडीजल कार्यक्रम वर्ष 2011 में परिवहन क्षेत्र के लिए B5 मिश्रण के साथ शुरू हुआ था। इसके बाद इसे B7, B10 और B20 तक बढ़ाया गया। अब B15 के व्यापक विस्तार की तैयारी हो रही है।B15 लागू होने से देश में पाम ऑयल की घरेलू खपत बढ़कर करीब 8 लाख टन प्रति वर्ष होने का अनुमान है, जबकि B10 कार्यक्रम के तहत यह लगभग 5.3 लाख टन थी। भविष्य में यदि B20 पूरी तरह लागू होता है, तो घरेलू पाम ऑयल मांग 10 लाख टन सालाना से अधिक हो सकती है।
सरकार का कहना है कि, इससे छोटे किसानों की आय को सहारा मिलेगा, स्थानीय बाजार को स्थिरता मिलेगी और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी।लंबी अवधि की योजना के तहत मलेशिया 2030 तक B30 बायोडीजल मानक लागू करने की तैयारी कर रहा है। सरकार मानती है कि बायोडीजल उद्योग देश के ऊर्जा परिवर्तन और टिकाऊ विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा।

