काठमांडू : बारा जिले के जितपुर में स्थित राष्ट्रीय गन्ना अनुसंधान कार्यक्रम इन दिनों कर्मचारियों के कमी के संकट से गुजर रहा है। 26 स्वीकृत पदों के मुकाबले यहाँ फिलहाल केवल नौ कर्मचारी ही काम कर रहे हैं।
मुख्य वैज्ञानिक और वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पद खाली पड़े होने के कारण गन्ना क्षेत्र में शोध और नवाचार की गतिविधियाँ बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।द काठमांडू पोस्ट ने यह खबर दी है।
अधिकारियों ने बताया कि, इस कमी की वजह से देश का एकमात्र समर्पित गन्ना अनुसंधान कार्यक्रम अपने मूल उद्देश्यों को पूरा करने में बेहद कठिनाइयों का सामना कर रहा है। 26 स्वीकृत पदों में से मुख्य वैज्ञानिक का पद खाली है। छह विशेषज्ञ वैज्ञानिक पदों में से केवल दो पर नियुक्ति हुई है। वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी के तीनों पद भी रिक्त हैं।
इसी तरह तीन तकनीकी सहायक पदों में से केवल दो भरे हुए हैं, जबकि आठ तकनीकी सहायक पदों में से चार पर ही कर्मचारी हैं। प्रशासनिक सहायक, भारी वाहन चालक और मुख्य प्रशासनिक सहायक के पद भी खाली हैं। हालांकि एक लेखा अधिकारी कार्यरत हैं, लेकिन वे अतिरिक्त जिम्मेदारी के रूप में बीरगंज के रानीघाट स्थित कृषि उपकरण अनुसंधान केंद्र का काम भी संभाल रहे हैं।
कार्यक्रम प्रमुख दिल राज यादव ने कहा कि, तकनीकी कर्मचारियों की कमी के चलते संस्था के मूल लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि इस कार्यालय का मुख्य उद्देश्य गन्ने की फसल पर शोध करना है और इसके लिए अनुसंधान परियोजनाओं और नवाचार से लेकर परिचालन कार्य तक सब कुछ संभालना जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि कार्यालय को मिट्टी की सेहत, फसल की बीमारियों और कीट प्रबंधन पर अध्ययन करने का दायित्व सौंपा गया है, लेकिन तकनीकी मानव संसाधन की कमी के कारण नतीजे देने की क्षमता सीमित हो गई है। यादव ने चिंता जताते हुए कहा कि नई तकनीकें विकसित करने में दिक्कतें आ रही हैं और कर्मचारियों की कमी के चलते कार्य से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे।

