नई दिल्ली : नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) ने केंद्र सरकार से हाल ही में अधिसूचित चीनी भंडारण सीमा (स्टॉक होल्डिंग लिमिट) की समीक्षा करने का आग्रह किया है।
फेडरेशन का कहना है कि, नई सीमा लागू होने से पूर्वोत्तर राज्यों में चीनी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और चीनी पर आधारित विनिर्माण उद्योगों के संचालन पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
NFCSF ने उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के संयुक्त सचिव (चीनी) अश्विनी श्रीवास्तव को भेजे पत्र में 28 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना पर चिंता जताई है। यह अधिसूचना आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और शुगर (कंट्रोल) ऑर्डर, 2025 के तहत जारी की गई है, जिसमें चीनी डीलरों के लिए अधिकतम 4,000 क्विंटल भंडारण सीमा और 30 दिनों तक ही स्टॉक रखने की अनुमति निर्धारित की गई है।
महासंघ ने कहा कि, पहले लागू शुगर (कंट्रोल) ऑर्डर, 1966 के तहत कोलकाता और उसके विस्तारित क्षेत्र में चीनी आयात करने वाले मान्यता प्राप्त डीलरों को 10,000 क्विंटल तक स्टॉक रखने की अनुमति थी। यह उच्च सीमा इसलिए दी गई थी क्योंकि कोलकाता पूर्वोत्तर राज्यों के लिए चीनी आपूर्ति का प्रमुख ट्रांजिट और वितरण केंद्र है।
एनएफसीएसएफ के अनुसार, प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों से चीनी मुख्य रूप से रेलवे रैक के माध्यम से कोलकाता पहुंचती है, जहां उसे कोलकाता और डंकुनी टर्मिनलों पर उतारकर रेल और सड़क मार्ग से पूर्वोत्तर राज्यों में भेजा जाता है। ऐसे में पूरे देश के लिए समान 4,000 क्विंटल की सीमा निर्धारित करना वास्तविक लॉजिस्टिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। महासंघ ने चेतावनी दी कि, अनुमेय स्टॉक स्तर कम होने से पूर्वोत्तर क्षेत्र में चीनी की निर्बाध आपूर्ति बाधित हो सकती है, परिवहन लागत बढ़ सकती है और क्षेत्रीय स्तर पर आपूर्ति असंतुलन की स्थिति पैदा हो सकती है।
चीनी आधारित उद्योगों पर भी असर की आशंका
एनएफसीएसएफ ने शुगर (कंट्रोल) ऑर्डर, 2025 में "डीलर" की विस्तारित परिभाषा पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें अब चीनी को कच्चे माल के रूप में उपयोग करने वाले प्रोसेसर और विनिर्माण इकाइयों को भी शामिल किया गया है।महासंघ ने कहा कि कन्फेक्शनरी, बिस्कुट, पेय पदार्थ, दवा और अन्य खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियां चीनी का उपयोग केवल अपने उत्पादन के लिए करती हैं, न कि व्यापार या पुनर्विक्रय के लिए। ऐसे उद्योगों पर भी वही भंडारण सीमा लागू करने से उत्पादन कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं, विनिर्माण संचालन में बाधा आ सकती है और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ सकता है। इसीलिए एनएफसीएसएफ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि जो उद्योग केवल अपने उत्पादन (कैप्टिव कंजम्प्शन) के लिए चीनी का उपयोग करते हैं, उन्हें भंडारण सीमा से छूट दी जाए, या उनके लिए अलग और उपयुक्त भंडारण सीमा निर्धारित की जाए।

