क्वींसलैंड: गन्ना उत्पादकों के लिए नए पेराई सीजन की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन इस बार किसानों के सामने आर्थिक और संचालन संबंधी कई चुनौतियां खड़ी हैं। टेबललैंड क्षेत्र में सात महीने लंबे गन्ना कटाई सीजन की शुरुआत 18 मई को एमएसएफ की अरिगा मिल में गन्ने की पहली खेप पहुंचने के साथ हुई।
इसके बाद टुली शुगर मिल ने 26 मई से पेराई कार्य शुरू किया। इस बार अधिक फसल उत्पादन के कारण मिल ने सामान्य समय से करीब तीन सप्ताह पहले ही पेराई शुरू कर दी। केर्न्स से गोल्ड कोस्ट तक बाकी चीनी मिलों में भी जून के दौरान पेराई शुरू होने की उम्मीद है।
इस सीजन में गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में मौसम और खेतों की स्थिति सामान्य रूप से अनुकूल रही है। दिसंबर तक लगभग 2.9 करोड़ टन गन्ने की कटाई और पेराई होने का अनुमान है। हालांकि,अच्छी फसल की उम्मीद के बावजूद किसानों की चिंता कम नहीं हुई है। कैनग्रोवर्स के अध्यक्ष ओवेन मेंकेंस ने कहा कि, वर्ष 2026 गन्ना उत्पादक परिवारों के लिए आर्थिक और मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि, फसल अच्छी दिख रही है और अब तक मौसम भी अनुकूल रहा है, लेकिन चीनी की कीमतों में कमजोरी किसानों पर भारी पड़ रही है। वैश्विक बाजार में चीनी के दामों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर ऑस्ट्रेलियाई गन्ना उत्पादकों पर पड़ता है। इसके साथ खेती की लागत भी लगातार बढ़ रही है।
गन्ना उद्योग के सामने सिर्फ चीनी कीमतों की चुनौती ही नहीं है, बल्कि डीजल आपूर्ति को लेकर भी चिंता बनी हुई है। किसानों को डर है कि, कटाई सीजन के दौरान पर्याप्त डीजल नहीं मिल पाने से काम प्रभावित हो सकता है। बताया गया है कि, साल के अंत तक गन्ना कटाई, बुवाई और मिलों तक परिवहन के लिए करीब 10 करोड़ लीटर डीजल की जरूरत होगी। अप्रैल में किए गए एक सर्वे के मुताबिक किसानों के पास चार मिलियन लीटर से भी कम डीजल उपलब्ध था, जबकि हर 10 में से एक किसान ने हाल के हफ्तों में ईंधन खरीदने की कोशिश की लेकिन उसे पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल सकी।इसके अलावा उर्वरक की उपलब्धता भी चिंता का विषय बनी हुई है। दिसंबर तक किसानों को करीब 1.30 लाख टन यूरिया की आवश्यकता होगी।

