नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ईएसवाई) 2025-26 के लिए 1.49 अरब लीटर अतिरिक्त एथेनॉल खरीद के अनुबंध चौथी तिमाही (फोर्थ क्वार्टर) के बोलीदाताओं को देने की अनुमति प्रदान की है।
साथ ही, अदालत द्वारा स्वीकार की गई अंतरिम व्यवस्था के तहत लॉन्ग टर्म ऑफटेक एग्रीमेंट (एलटीओए) न रखने वाले आपूर्तिकर्ताओं को भी अतिरिक्त एथेनॉल खरीद में अन्य आपूर्तिकर्ताओं के समान माना जाएगा।
अटॉर्नी जनरल ने रखा प्रस्ताव
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत के समक्ष यह अंतरिम व्यवस्था प्रस्तावित की थी। इस प्रस्ताव का समर्थन उन याचिकाकर्ताओं ने भी किया, जिन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट के पहले के आदेश को चुनौती दी थी।
कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को दी गई चुनौती
यह मामला मोदी बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य बनाम वीआईएनपी शुगर्स एंड डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड शीर्षक से चल रहे मामलों के समूह से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं ने 16 जून 2026 को कर्नाटक हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश द्वारा दिए गए उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें ओएमसी को एलटीओए धारक वीआईएनपी शुगर्स के उस आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया गया था, जिसमें कंपनी ने अपनी डिजाइन क्षमता तक इथेनॉल खरीद की मांग की थी।
हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
अंतरिम आदेश पारित करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के निर्देश के आधार पर भी सवाल उठाया और कहा कि अदालत इस आदेश के "आधार और औचित्य को समझने में कठिनाई महसूस कर रही है। "मोदी बायोटेक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार और अमित सिब्बल ने पैरवी की, जिन्हें करंजावाला एंड कंपनी एडवोकेट्स ने ब्रीफ किया था।इस अंतरिम व्यवस्था का कुछ पक्षकारों ने विरोध भी किया। 2023-24 के दौरान स्थापित एलटीओए इकाइयों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, वीआईएनपी शुगर्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे, तथा इंडियन शुगर मिल्स एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनींदर सिंह ने पक्ष रखा।

