कैनबरा: ऑस्ट्रेलिया में इस वर्ष गेहूं उत्पादन में बड़ी गिरावट आने की संभावना जताई गई है। बढ़ती ईंधन और उर्वरक कीमतों के साथ सूखे मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते कई किसानों ने गेहूं की बुवाई में भारी कटौती की है।
अनुमान है कि, देश की कुल गेहूं पैदावार इस बार लगभग 50 प्रतिशत तक घट सकती है। मध्य पूर्व में तीन महीने से जारी संघर्ष और होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने का असर वैश्विक कृषि बाजार पर भी पड़ा है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसका सीधा असर खेती की लागत पर पड़ा है। ईंधन और रासायनिक उर्वरकों की बढ़ती कीमतों ने किसानों के खर्च में बड़ा इजाफा कर दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में डीजल की कीमतें संघर्ष से पहले की तुलना में 35 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं, जबकि यूरिया जैसे नाइट्रोजन उर्वरकों के दाम 70 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इससे खेती की कुल लागत काफी बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सीजन में ऑस्ट्रेलिया में सर्दियों की फसलों के कुल रकबे में 8 प्रतिशत की कमी आ सकती है। गेहूं की बुवाई में अकेले 20 प्रतिशत से अधिक गिरावट का अनुमान है। देश के पूर्वी हिस्सों में सूखे की वजह से हालात ज्यादा खराब हैं। क्वींसलैंड में फसल क्षेत्र करीब 35 प्रतिशत और न्यू साउथ वेल्स में लगभग 29 प्रतिशत घटने की संभावना है। वहीं पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में बेहतर नमी के कारण स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है।
कई किसान अब गेहूं छोड़कर कम लागत वाली फसलों जैसे जौ और कैनोला की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितता किसानों को फसल बदलने के लिए मजबूर कर रही है। अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि, गेहूं उत्पादन में कमी का असर आने वाले महीनों में खाद्य बाजार पर भी दिख सकता है। ब्रेड, पास्ता और अन्य गेहूं उत्पादों के दाम बढ़ सकते हैं। इसके साथ ही चीनी, डेयरी और कोको जैसी अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।

