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उत्तर प्रदेश में गन्ना मूल्य भुगतान बकाया से पेराई सत्र के अंत में बढ़ा दबाव, किसानों के सामने आर्थिक संकट

उत्तर प्रदेश में गन्ना मूल्य भुगतान बकाया से पेराई सत्र के अंत में बढ़ा दबाव, किसानों के सामने आर्थिक संकट

ChiniMandi Hindi 6 days ago

मेरठ: उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी गन्ना बेल्ट-मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और बिजनौर-के किसान इन दिनों भुगतान बकाया को लेकर परेशान हैं। जैसे-जैसे चीनी मिलों में पेराई सत्र समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, किसानों की चिंता भी बढ़ती जा रही है।

ईटिव्ही भारत में प्रकाशित खबर के अनुसार, अभी तक बड़ी संख्या में किसानों को गन्ने का पूरा भुगतान नहीं मिल पाया है।

मेरठ जिले में करीब 1.52 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है और यहां दो लाख से अधिक गन्ना किसान हैं। जिले में किनौनी, दौराला, सकोती, मोहिउद्दीनपुर, नंगलामल और मवाना समेत छह चीनी मिलें संचालित हैं। इन मिलों को गन्ना आपूर्ति करने वाले किसानों को भुगतान में देरी का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय किसान यूनियन के अनुसार, केवल किनौनी शुगर मिल पर ही लगभग 350 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है, जो 35 हजार से अधिक किसानों का है। इस वजह से बड़ी संख्या में किसान आर्थिक दबाव में हैं।

भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने 'ईटिव्ही भारत' से बात करते हुए कहा कि, किसानों की समस्या को समझने वाला कोई नहीं है और यह मिल पिछले कई वर्षों से किसानों को परेशान कर रही है। उन्होंने बताया कि, किसान इस मिल को गन्ना देने से भी बचना चाहते हैं। किसान दिवस के दौरान भी अधिकारियों से जल्द भुगतान की मांग उठाई गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भुगतान शीघ्र नहीं हुआ तो किसानों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।हालांकि, सभी मिलों की स्थिति एक जैसी नहीं है। किसानों के अनुसार, मवाना, नंगलामल और दौराला शुगर मिलों ने लगभग शत-प्रतिशत भुगतान किया है, जिससे वहां के किसानों को राहत मिली है।

जिला गन्ना अधिकारी ब्रजकिशोर पटेल ने बताया कि, किनौनी मिल को बकाया भुगतान के लिए नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि सकोती शुगर मिल अब तक 97 प्रतिशत किसानों का भुगतान कर चुकी है, जबकि मोहिउद्दीनपुर मिल ने करीब 90 प्रतिशत भुगतान किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि किनौनी शुगर मिल अब तक केवल लगभग 38 प्रतिशत भुगतान ही कर पाई है, जिसे जल्द पूरा कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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