मैसूरु: इंडियन शुगरकेन फार्मर्स एसोसिएशन (ISFA) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एथेनॉल उत्पादन और पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने की नीति जारी रखने का आग्रह किया है। संगठन ने कहा कि, सरकार को विपक्षी दलों की आलोचना या पेट्रोलियम लॉबी के दबाव के आगे नहीं झुकना चाहिए।
ISFA के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कर्नाटक राज्य गन्ना उत्पादक संघ के अध्यक्ष कुरुबुर शांतकुमार ने प्रधानमंत्री को अंग्रेजी में तथा केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री को कन्नड़ भाषा में अलग-अलग पत्र भेजकर केंद्र सरकार से एथेनॉल नीति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखने की अपील की। यह जानकारी 'डेक्कन हेराल्ड' की एक रिपोर्ट में दी गई है।
शांतकुमार ने गन्ना, धान और मक्का जैसे कृषि उत्पादों से एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार के प्रयासों का स्वागत किया। उन्होंने आरोप लगाया कि, विपक्षी दलों और कुछ संगठनों द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन से वाहनों के इंजन को नुकसान होता है या माइलेज कम हो जाता है, जो भ्रामक है और विदेशी पेट्रोलियम उत्पादकों के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से फैलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि, देश में एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि होगी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और भारत आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनेगा। पत्र में कहा गया है कि, यदि भारत आयातित कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता कम कर एथेनॉल मिश्रण को बढ़ाता है, तो देश को लगभग 4 लाख करोड़ रुपये तक की विदेशी मुद्रा बचत हो सकती है। इस राशि का उपयोग बुनियादी ढांचा विकास और अन्य राष्ट्रीय परियोजनाओं में किया जा सकता है।
शांतकुमार ने केंद्र सरकार से गन्ना किसानों और अन्य किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए विपक्षी आलोचनाओं के बावजूद इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का समर्थन जारी रखने का आग्रह किया। उनका कहना है कि एक स्थिर और दीर्घकालिक इथेनॉल नीति कृषि क्षेत्र को मजबूती देगी, भारत की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाएगी और आयात बिल को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

