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नाटो शिखर सम्मेलन में ट्रंप की अहम मुलाकातें, यूक्रेन और सीरिया पर टिकी दुनिया की नजर | Cliq Latest

नाटो शिखर सम्मेलन में ट्रंप की अहम मुलाकातें, यूक्रेन और सीरिया पर टिकी दुनिया की नजर | Cliq Latest

Cliq India 1 week ago

मेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाटो शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठकों में भाग लेने वाले हैं। इस दौरान उनकी मुलाकात यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की और सीरिया के अंतरिम नेता अहमद अल-शरा से प्रस्तावित है।

ऐसे समय में ये बैठकें हो रही हैं जब रूस-यूक्रेन युद्ध का समाधान अभी भी दूर दिखाई दे रहा है और मध्य पूर्व में बढ़ती अस्थिरता पश्चिमी देशों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।

इस वर्ष आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन में यूरोप की सुरक्षा, रक्षा व्यय, यूक्रेन को जारी समर्थन तथा गठबंधन की दीर्घकालिक रणनीतिक प्राथमिकताएं प्रमुख चर्चा का विषय रही हैं। डोनाल्ड ट्रंप की भागीदारी पर पूरी दुनिया की नजर है, क्योंकि वह पहले भी नाटो सदस्य देशों से अधिक रक्षा व्यय की मांग करते रहे हैं और यूक्रेन युद्ध तथा मध्य पूर्व के मुद्दों पर उनका दृष्टिकोण कई यूरोपीय सहयोगियों से अलग माना जाता है।

शिखर सम्मेलन का अंतिम दिन ट्रंप की कूटनीतिक क्षमता की महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है। उनकी मुलाकात ऐसे नेताओं से होगी जिनके साथ रूस-यूक्रेन संघर्ष और ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रमों को लेकर सार्वजनिक रूप से मतभेद सामने आ चुके हैं। हालांकि इन मतभेदों के बावजूद नाटो के सदस्य देशों को उम्मीद है कि यह संवाद गठबंधन की एकजुटता को और मजबूत करेगा तथा बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में साझा रणनीति बनाने में मदद करेगा।

यूक्रेन युद्ध पर ट्रंप और ज़ेलेंस्की की बैठक रहेगी सबसे अहम

नाटो शिखर सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की की वार्ता को माना जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन को सैन्य सहायता, युद्ध समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों तथा पूर्वी यूरोप की सुरक्षा स्थिति पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर ऐसे दौर में पहुंच गया है जहां दोनों पक्ष सैन्य अभियान जारी रखे हुए हैं, जबकि शांति वार्ता की संभावनाएं अभी भी सीमित बनी हुई हैं। यूक्रेन लगातार अपने पश्चिमी सहयोगियों से सैन्य और आर्थिक सहायता बनाए रखने की अपील करता रहा है। उसका कहना है कि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।

डोनाल्ड ट्रंप का दृष्टिकोण इस मुद्दे पर कई यूरोपीय नेताओं से अलग रहा है। वह लंबे समय से इस बात पर जोर देते रहे हैं कि युद्ध समाप्त करने के लिए कूटनीतिक बातचीत को अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने यूरोपीय देशों से यह भी कहा है कि वे यूक्रेन को मिलने वाली आर्थिक और सैन्य सहायता में अधिक जिम्मेदारी निभाएं।

नीतिगत मतभेदों के बावजूद नाटो सदस्य देश क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर समन्वय बनाए रखने के पक्षधर हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप और ज़ेलेंस्की की यह मुलाकात यूक्रेन को लेकर अमेरिका की आगे की रणनीति तथा नाटो की सामूहिक सुरक्षा नीति के बारे में महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है।

सम्मेलन में शामिल यूरोपीय नेता नाटो की पूर्वी सीमा पर रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने, सैन्य सहयोग बढ़ाने तथा संभावित सुरक्षा खतरों के विरुद्ध निरोधक क्षमता को और सशक्त बनाने पर भी चर्चा कर रहे हैं। रूस के साथ जारी तनाव के कारण ये विषय गठबंधन की रणनीतिक प्राथमिकताओं में लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।

मध्य पूर्व और सीरिया की स्थिति पर भी होगी व्यापक चर्चा

डोनाल्ड ट्रंप के कार्यक्रम में सीरिया के अंतरिम नेता अहमद अल-शरा के साथ बैठक भी विशेष महत्व रखती है। इस वार्ता में क्षेत्रीय स्थिरता, आतंकवाद के विरुद्ध सहयोग, मानवीय स्थिति तथा सीरिया के राजनीतिक भविष्य जैसे विषय प्रमुख रह सकते हैं।

हाल के महीनों में ईरान से जुड़े घटनाक्रमों और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के कारण मध्य पूर्व एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बना हुआ है। नाटो सदस्य देश इस क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं क्योंकि यहां होने वाले घटनाक्रम वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा तथा मानवीय परिस्थितियों पर व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं।

सीरिया नाटो का सदस्य नहीं है, फिर भी उसकी भौगोलिक स्थिति और लंबे समय से जारी संघर्ष पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित करता है। ऐसे में ट्रंप और अहमद अल-शरा के बीच संभावित वार्ता को क्षेत्रीय राजनीतिक संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की ज़ेलेंस्की और अहमद अल-शरा से होने वाली बैठकें इस बात का संकेत हैं कि वर्तमान वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में यूरोप और मध्य पूर्व की चुनौतियां एक-दूसरे से जुड़ती जा रही हैं। किसी एक क्षेत्र में होने वाला घटनाक्रम दूसरे क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।

रक्षा व्यय, नई सुरक्षा चुनौतियां और नाटो की भविष्य की रणनीति

पूरे नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर यूरोपीय सदस्य देशों से रक्षा क्षेत्र में अधिक निवेश करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना है कि गठबंधन की सामूहिक सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी सदस्य देशों को अपने रक्षा व्यय संबंधी दायित्वों का पूरी तरह पालन करना चाहिए।

ट्रंप ने सम्मेलन के दौरान विभिन्न कार्य सत्रों में सहयोगी देशों के नेताओं के साथ भाग लेकर कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। कूटनीतिक सूत्रों का मानना है कि यह सम्मेलन सदस्य देशों के लिए अनेक वैश्विक संकटों पर साझा रणनीति तैयार करने और सामूहिक सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का महत्वपूर्ण अवसर है।

पारंपरिक सैन्य सहयोग के अतिरिक्त सम्मेलन में साइबर सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियां, ऊर्जा सुरक्षा तथा मिश्रित सुरक्षा खतरों से निपटने की रणनीतियों पर भी व्यापक चर्चा हुई। बदलते वैश्विक परिदृश्य में ये विषय नाटो की प्राथमिकताओं में तेजी से शामिल हुए हैं।

अंकारा में ट्रंप की इन बैठकों को केवल द्विपक्षीय वार्ताओं तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इनके परिणाम भविष्य में यूक्रेन, मध्य पूर्व और व्यापक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर नाटो सदस्य देशों के बीच समन्वय को भी प्रभावित कर सकते हैं।

शिखर सम्मेलन के समापन के साथ अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या इन उच्चस्तरीय बैठकों से नई कूटनीतिक पहल को गति मिलेगी या सदस्य देशों के बीच पहले से मौजूद नीतिगत मतभेद ही प्रमुख बने रहेंगे। हालांकि तात्कालिक परिणाम चाहे जो भी हों, यह स्पष्ट है कि नाटो आज भी विश्व की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है और वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच संवाद का प्रमुख मंच बना रहेगा।

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