दिल्ली: दलीप ट्रॉफी के आगामी सत्र के लिए ईस्ट ज़ोन की टीम का ऐलान होने के बाद 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को उपकप्तान बनाए जाने का फैसला चर्चा का विषय बन गया है. ईशान किशन को कप्तान बनाए जाने पर किसी को ज्यादा हैरानी नहीं हुई, लेकिन वैभव को इतनी कम उम्र में यह जिम्मेदारी मिलने पर कई सवाल उठ रहे हैं.
क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले का मानना है कि वैभव में शानदार प्रतिभा है, लेकिन लाल गेंद के क्रिकेट में उन्हें अभी काफी सीखना बाकी है. उन्होंने कहा कि वैभव ने अब तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट में बहुत कम मैच खेले हैं और उनका प्रदर्शन भी अभी साधारण रहा है. ऐसे में उन्हें सीनियर टीम का उपकप्तान बनाना थोड़ा जल्दबाजी वाला फैसला लगता है.
वहीं, ईस्ट ज़ोन के चयनकर्ताओं का कहना है कि यह फैसला सिर्फ आज को देखकर नहीं लिया गया है. उनका मानना है कि उपकप्तान बनने से वैभव को कप्तान के साथ काम करने और टीम को संभालने का तरीका सीखने का मौका मिलेगा. इससे भविष्य में वह बेहतर खिलाड़ी और बेहतर लीडर बन सकेंगे.
चयन समिति ने साफ किया है कि उपकप्तान बनने का मतलब यह नहीं है कि अगर ईशान किशन किसी मैच में नहीं खेलेंगे तो वैभव ही कप्तानी करेंगे. ऐसी स्थिति में किसी अनुभवी खिलाड़ी को कप्तान बनाया जाएगा. वैभव का मुख्य काम अभी टीम के साथ रहकर नेतृत्व की बारीकियां सीखना है.
ओडिशा के पूर्व क्रिकेटर प्रवंजन मलिक ने इस फैसले का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि वैभव पहले भी बिहार की टीम में उपकप्तान की जिम्मेदारी निभा चुके हैं. उनके मुताबिक, विकेटकीपर होने की वजह से ईशान किशन पूरे मैच के दौरान खेल को करीब से देखते हैं. ऐसे में वैभव को उनके साथ रहकर काफी कुछ सीखने का मौका मिलेगा. चयनकर्ताओं को भरोसा है कि यह अनुभव भविष्य में वैभव के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा.

