दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत, भरोसेमंद और सम्मानित खिलाड़ियों में शामिल अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है।
रहाणे ने अपने करियर में कई ऐसे ऐतिहासिक पल दिए, जिन्हें भारतीय क्रिकेट प्रशंसक हमेशा याद रखेंगे। उन्होंने क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मैदान लॉर्ड्स पर शानदार शतक जड़कर इतिहास रचा, जबकि 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में विराट कोहली के स्वदेश लौटने और टीम इंडिया के चोटों से जूझने के बावजूद कप्तान के रूप में ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर हराकर गाबा का अभेद्य किला ध्वस्त कर दिया। मैदान के बाहर भी उनका व्यक्तित्व उतना ही शानदार रहा। अफगानिस्तान को टेस्ट में हराने के बाद ट्रॉफी उठाने से पहले उन्होंने पूरी अफगान टीम को साथ फोटो खिंचवाने के लिए बुलाया, जो उनकी खेल भावना का बेहतरीन उदाहरण बना। इसके अलावा उन्होंने आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स और राजस्थान रॉयल्स जैसी टीमों की कप्तानी भी की।
रहाणे का करियर कई ऐसे रिकॉर्डों से भरा है, जिन्हें आज भी तोड़ पाना बेहद मुश्किल माना जाता है। 2015 में श्रीलंका के खिलाफ एक ही टेस्ट मैच में 8 कैच पकड़कर उन्होंने भारतीय क्रिकेट का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया, जिसकी बराबरी आज तक कोई भारतीय खिलाड़ी नहीं कर सका। ऑस्ट्रेलिया के प्रतिष्ठित बॉक्सिंग डे टेस्ट में उन्होंने 2014 में खिलाड़ी और 2020 में कप्तान के रूप में शतक लगाया, ऐसा करने वाले वह भारत के इकलौते क्रिकेटर हैं। वहीं 2015 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नंबर-5 पर बल्लेबाजी करते हुए दोनों पारियों में शतक जड़ने का अनोखा कारनामा भी केवल रहाणे के नाम दर्ज है।
टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी रहाणे का एक रिकॉर्ड आज तक अटूट है। उन्होंने 2011 में इंग्लैंड के खिलाफ अपने टी20 डेब्यू मैच में 61 रन बनाए थे, जो आज भी किसी भारतीय बल्लेबाज द्वारा टी20 अंतरराष्ट्रीय पदार्पण पर बनाया गया सर्वोच्च स्कोर है। अपने शांत स्वभाव, शानदार नेतृत्व, बेहतरीन फील्डिंग और मुश्किल परिस्थितियों में टीम इंडिया को संभालने की क्षमता के कारण अजिंक्य रहाणे हमेशा भारतीय क्रिकेट के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में गिने जाएंगे। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से उनकी विदाई एक युग का अंत है, लेकिन भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान और उनकी उपलब्धियां हमेशा सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेंगी।

