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बर्बादी की कगार पर पाकिस्तान: अमेरिका-ईरान जंग ने तोड़ी अर्थव्यवस्था की कमर, शहबाज शरीफ बोले- 'अब बस 7 दिन का तेल बचा'

बर्बादी की कगार पर पाकिस्तान: अमेरिका-ईरान जंग ने तोड़ी अर्थव्यवस्था की कमर, शहबाज शरीफ बोले- 'अब बस 7 दिन का तेल बचा'

स्लामाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव की तपिश अब पाकिस्तान की दहलीज तक जा पहुंची है। युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल ने पाकिस्तान के खस्ताहाल आर्थिक ढांचे को हिलाकर रख दिया है।

खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कैबिनेट बैठक में इस संकट को स्वीकार करते हुए देश को चेतावनी दी है कि आने वाले दिन बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।

तेल आयात बिल में $500 मिलियन का जोरदार झटका

कैबिनेट बैठक को संबोधित करते हुए पीएम शहबाज शरीफ ने बताया कि संघर्ष शुरू होने से पहले पाकिस्तान का तेल आयात बिल जो 300 मिलियन डॉलर था, वह अब बढ़कर 800 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। महज कुछ दिनों के भीतर 500 मिलियन डॉलर के इस अतिरिक्त बोझ ने पाकिस्तानी खजाने को खाली कर दिया है। प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि इस भारी खर्च की वजह से देश की अर्थव्यवस्था पर असहनीय दबाव पड़ा है, जिसकी वजह से पेट्रोलियम की खपत में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है।

मध्यस्थता की नाकाम कोशिश और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय नाराजगी

पाकिस्तान इस युद्ध में मध्यस्थता करने के लिए काफी बेचैन नजर आ रहा था, लेकिन शहबाज शरीफ के ताजा बयान ने यह साफ कर दिया कि यह बेचैनी शांति के लिए नहीं बल्कि अपनी डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए थी। पाकिस्तान की ‘शांति दूत’ बनने की कोशिशें पूरी तरह नाकाम रहीं क्योंकि ईरान और अमेरिका, दोनों ही बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं। इसके अलावा, ईरान और अमेरिका के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में पाकिस्तान ने अपने मददगार देश UAE को भी नाराज कर दिया है। अमीरात इस बात से खफा है कि पाकिस्तान ने ईरानी हमलों के खिलाफ कड़ा रुख नहीं अपनाया, जिसके बाद उसने अपनी दी गई आर्थिक मदद वापस मांग ली है।

देश में लॉकडाउन जैसे हालात, 7 दिन का बचा है रिजर्व

पाकिस्तान के ऊर्जा और वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट ने जनता की नींद उड़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के पास अब केवल 5 से 7 दिनों का कच्चा तेल बचा है। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि सरकार ने तेल बचाने के लिए लोगों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ की सलाह दी है। सरकारी खजाना भरने के लिए मंत्रियों और अफसरों के वेतन में कटौती की जा रही है। शहबाज शरीफ ने माना कि यह स्थिति ‘लंका लगने’ जैसी है और इससे निपटना अकेले पाकिस्तान के बस की बात नहीं है।

कर्ज चुकाने के लिए भी लेना पड़ रहा है कर्ज

पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति इस कदर बिगड़ चुकी है कि वह ‘कर्ज के जाल’ (Debt Trap) में पूरी तरह फंस गया है। UAE द्वारा मदद वापस मांगे जाने के बाद अब पाकिस्तान सऊदी अरब जैसे देशों के सामने झोली फैलाने को मजबूर है, ताकि एक पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नया कर्ज लिया जा सके। हालांकि पीएम ने पेट्रोलियम मंत्री की तारीफ करते हुए कहा कि अन्य देशों की तुलना में फिलहाल पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें नहीं हैं, लेकिन तेल भंडार का खत्म होना किसी बड़ी तबाही का संकेत दे रहा है।

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