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मप्र के मंडला में दर्दनाक हादसा: एम्बुलेंस न मिलने पर महिला ने ऑटो में दिया 4 बच्चों को जन्म, जन्म के कुछ ही देर बाद चारों नवजातों की मौत!

मप्र के मंडला में दर्दनाक हादसा: एम्बुलेंस न मिलने पर महिला ने ऑटो में दिया 4 बच्चों को जन्म, जन्म के कुछ ही देर बाद चारों नवजातों की मौत!

मंडला: मध्य प्रदेश के मंडला ज़िले से एक बेहद हृदयविदारक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहां एक गर्भवती महिला को समय पर सरकारी एम्बुलेंस नहीं मिल सकी, जिसके बाद मजबूरन परिजन उसे ऑटो-रिक्शा से अस्पताल ले जाने लगे।

इसी दौरान रास्ते में ही महिला ने एक साथ चार बच्चों (क्वाड्रुपलेट्स) को जन्म दे दिया। बेहद दर्दनाक बात यह रही कि जन्म के कुछ ही देर बाद चारों नवजात बच्चों की मौत हो गई। इस घटना के बाद से पीड़ित परिवार स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगा रहा है, जबकि प्रशासन समय से पहले प्रसव को मौत की वजह बता रहा है।

एम्बुलेंस के लिए भटकता रहा परिवार, ऑटो में गूंजी किलकारी और फिर छा गया मातम

पीड़ित परिवार का आरोप है कि मंगलवार को महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा (Labor Pain) शुरू हुई थी। दर्द से तड़पती महिला के परिजनों ने तुरंत सरकारी इमरजेंसी एम्बुलेंस सेवा को फोन मिलाया, लेकिन बार-बार कॉल करने के बावजूद वहां से कोई जवाब नहीं मिला और न ही कोई एम्बुलेंस मौके पर पहुंची। जब हालत बिगड़ने लगी, तो परिजनों ने बिना समय गंवाए एक ऑटो-रिक्शा (निजी वाहन) का इंतजाम किया और महिला को अस्पताल लेकर भागे। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही चलती ऑटो में महिला ने तीन बच्चियों और एक बच्चे समेत कुल चार बच्चों को जन्म दे दिया। कुछ ही पलों में इन मासूमों की सांसें थम गईं और परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं।

स्वास्थ्य अधिकारी की सफाई: प्री-मैच्योर डिलीवरी और कम वजन के कारण गई जान

इस दुखद मामले पर मंडला के जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. डी.जे. मोहंती ने स्वास्थ्य विभाग का पक्ष रखते हुए बताया कि नाइगांव की रहने वाली रजनी सिंगाराम को गर्भावस्था के केवल सातवें महीने में ही प्रसव पीड़ा शुरू हो गई थी। परिजन उन्हें पहले घुथास के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र लेकर आए थे, जहां महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें तुरंत बिछिया के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के लिए रेफर कर दिया गया।

सीएमएचओ के मुताबिक, बिछिया अस्पताल पहुंचने से पहले ही महिला का प्रसव वाहन में हो गया। उन्होंने दावा किया कि चारों बच्चों की मौत का मुख्य कारण उनका समय से पहले (Pre-mature Delivery) पैदा होना और शरीर का अधूरा विकास था। जन्म के समय चारों बच्चों में से हर एक का वजन मात्र 1.5 किलोग्राम के आसपास था। अधिकारी ने यह भी साफ किया कि प्रसूता रजनी को बिछिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कर लिया गया है और फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर है।

पीड़ित पति का दावा- ‘समय पर मिलती एम्बुलेंस तो बच जाती बच्चों की जान’

दूसरी ओर, नवजातों के पिता गणेश सिंगाराम का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों के दावों को खारिज करते हुए सीधा आरोप लगाया कि अगर इमरजेंसी कॉल पर विभाग ने तत्परता दिखाई होती और उनकी पत्नी को समय पर एम्बुलेंस मिल गई होती, तो चारों बच्चे आज जिंदा होते। अस्पताल के रास्ते में सही मेडिकल केयर न मिलने के कारण बच्चों की जान गई है।

कलेक्टर बोले- शिकायत मिलते ही होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई

जब इस पूरे संवेदनशील और गंभीर मामले को लेकर मंडला के जिला मजिस्ट्रेट (DM) राहुल नामदेव धोटे से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि प्रशासनिक स्तर पर उन्हें इस घटना या एम्बुलेंस सेवा न मिलने के संबंध में अब तक कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि जैसे ही पीड़ित परिवार या किसी माध्यम से शिकायत मिलती है, पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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