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फर्जी मैट्रोमोनियल साइट के जरिए कुंवारों को बनाती थी शिकार: सुंदर दुल्हनियां का सपना दिखाकर टप्पेबाजी का भंडाफोड़!

फर्जी मैट्रोमोनियल साइट के जरिए कुंवारों को बनाती थी शिकार: सुंदर दुल्हनियां का सपना दिखाकर टप्पेबाजी का भंडाफोड़!

कानपुर: सुंदर बीवी की चाहत किसे नहीं होती है? जब सात फेरों की सही उम्र गुजरने लगे और असल जिंदगी में दुल्हन का दीदार मुश्किल हो जाए, तो लोग मैट्रोमोनियल साइट्स का सहारा लेते हैं। कानपुर की एक शातिर हसीना ने कुंवारों की इसी मजबूरी और ढलती उम्र के अकेलेपन को अपनी ठगी का धंधा बना लिया।

इंटरनेट की दुनिया में खूबसूरत लड़कियों की फर्जी तस्वीरें दिखाकर अधेड़ कुंवारों को जाल में फंसाने वाले एक हाई-प्रोफाइल सिंडिकेट का कानपुर वेस्ट पुलिस ने पर्दाफाश किया है।

छत्तीसगढ़ के कंप्यूटर एक्सपर्ट के साथ मिलकर बनाई ठगी की वैवाहिक साइट

डीसीपी पश्चिम सैय्यद मोहम्मद कासिम आबिदी ने इस सनसनीखेज टप्पेबाजी का खुलासा करते हुए बताया कि कल्याणपुर के आवास विकास की रहने वाली 25 वर्षीय अनुराधा को ग्रेजुएशन के बाद एक अच्छी नौकरी की तलाश थी। जब मनमुताबिक सैलरी नहीं मिली, तो उसने अपराध का शॉर्टकट चुना। अनुराधा ने सोशल मीडिया पर ठगी के गैंग के लिए पार्टनर्स की तलाश शुरू की, जहां उसकी मुलाकात छत्तीसगढ़ के कंप्यूटर एक्सपर्ट विक्रम खूटे से हुई। विक्रम तुरंत कानपुर आ गया और इस खेल में अनुराधा की सहेली प्रियंका (निवासी रामपाटी, बिल्हौर) भी शामिल हो गई। तीनों ने मिलकर ‘ऑनलाइन मैच प्वाइंट’ (Online Match Point) नाम से एक फर्जी मैट्रोमोनियल वेबसाइट तैयार की।

बड़ी रकम के बजाय 5-10 हजार की टप्पेबाजी, ताकि पुलिस तक न पहुंचे बात

इस गैंग की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी। ये लोग किसी भी शिकार से लाखों रुपये की बड़ी रकम नहीं ऐंठते थे, बल्कि रजिस्ट्रेशन, प्रोफाइल मैचिंग और डेटिंग अरेंज कराने के नाम पर सिर्फ 5 से 10 हजार रुपये ही वसूलते थे। रकम छोटी होने के कारण और लोक-लाज या जगहंसाई के डर से पीड़ित कुंवारे पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बजाय चुप बैठ जाते थे। इसी सामाजिक ताने-बाने का फायदा उठाकर अनुराधा के इस सिंडिकेट ने महज एक साल के भीतर देश के सैकड़ों लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना डाला।

नामचीन वेबसाइट्स से चुराते थे डेटा, कॉल सेंटर की लड़कियां करती थीं फोन

शिकार फंसाने के लिए अनुराधा और विक्रम ने देश की नामचीन और असली मैट्रोमोनियल साइट्स पर अपने फेक अकाउंट्स बना रखे थे। वहां से वे उन पुरुषों का डेटा निकालते थे जिनकी शादी की उम्र निकली जा रही थी। इसके बाद इस गैंग ने बकायदा एक किराए का मकान लेकर वहां एक अवैध कॉल सेंटर खोल रखा था। गैंग इंटरनेट से खूबसूरत हसीनाओं की तस्वीरें डाउनलोड कर पीड़ितों को फर्जी प्रोफाइल व्हाट्सएप पर भेजता था। जैसे ही पीड़ित तस्वीरों को देखकर जाल में फंसता, कॉल सेंटर की लड़कियां मीठी बातों में उलझाकर उनसे अपने एक्सिस बैंक और पीएनबी के खातों में क्यूआर कोड (QR Code) के जरिए पैसे ट्रांसफर करवा लेती थीं। पैसे आते ही पीड़ित का नंबर हमेशा के लिए ब्लॉक कर दिया जाता था।

कॉल सेंटर में 2 महीने से ज्यादा नहीं टिकते थे कर्मचारी, NCRB की शिकायत पर हुआ एक्शन

पकड़े जाने के डर से अनुराधा अपने इस कॉल सेंटर में काम करने वाले युवक-युवतियों को 2 से 3 महीने से ज्यादा नौकरी पर नहीं रखती थी, ताकि किसी को भी उनके इस गोरखधंधे की भनक न लग सके। लेकिन कहते हैं कि कानून के हाथ लंबे होते हैं। इस धोखाधड़ी के खिलाफ नेशनल क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRB Portal) पर शिकायतों की बाढ़ आ गई। इसके बाद हरकत में आई कानपुर वेस्ट पुलिस ने जाल बिछाकर किराए के मकान में चल रहे इस ठगी के सिंडिकेट का पूरी तरह भंडाफोड़ कर दिया। पुलिस ने मौके से अनुराधा, विक्रम और प्रियंका को गिरफ्तार कर लिया है। इनके पास से कॉल सेंटर में इस्तेमाल होने वाले 9 कंप्यूटर सेट, 105 मोबाइल सिम कार्ड, एक फिंगर स्कैनर मशीन, प्रिंटर, चेकबुक और फर्जी मुहरें बरामद की गई हैं।

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