Mumbai , 5 अप्रैल . India के आईपीओ मार्केट में मार्च 2026 में गतिविधियों में बढ़त देखने को मिली है और 38 कंपनियों ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआपएचपी) जमा कराएं हैं.
बीते साल मार्च में 22 कंपनियों ने, जबकि मार्च 2024 में 16 कंपनियों ने आईपीओ लाने के लिए डीआरएचपी जमा कराई थी.
बाजार के जानकारों का मानना है कि अधिक मात्रा में डीआरएचपी का आना कंपनियों का बढ़ता आत्मविश्वास और नियामक अनुमोदन की समयसीमा के अनुरूप रणनीतिक रूप से दाखिल किए गए दस्तावेजों का सही समय पर प्रस्तुत करना है.
आने वाले हफ्तों में भी यह गति जारी रहने की उम्मीद है, क्योंकि कई कंपनियां अपने ड्राफ्ट पेपर जमा करने की तैयारी कर रही हैं.
मार्च में डीआरएचपी दाखिल करने वाली 38 कंपनियों में से नौ कंपनियों ने गोपनीय तरीके से दस्तावेज दाखिल करने का विकल्प चुना.
एक्सिस कैपिटल ने एक रिपोर्ट में आईपीओ पाइपलाइन के बारे में बताते हुए कहा कि 64 कंपनियां वर्तमान में सेबी की मंजूरी का इंतजार कर रही हैं, जबकि 124 कंपनियों को नियामकीय मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन उन्होंने अभी तक अपने आईपीओ लॉन्च नहीं किए हैं.
इसके अतिरिक्त, मार्च 2025 से अब तक 20 कंपनियों ने गोपनीय डीआरएचपी फाइलिंग का विकल्प चुना है.
पिछले वित्तीय वर्ष में आईपीओ का व्यापक परिदृश्य सक्रिय रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 109 मेनबोर्ड आईपीओ लॉन्च किए गए, जिनमें से 69 अपने निर्गम मूल्य से ऊपर सूचीबद्ध हुए.
हालांकि, 31 मार्च 2026 तक, इनमें से तीन कंपनियां अभी तक स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध नहीं हुई थीं.
2026 में अब तक 18 कंपनियों ने आईपीओ लॉन्च किए हैं, अस्थिर परिस्थितियों और भू-Political तनावों के बावजूद इसमें से आठ ऑफरिंग मार्च में ही बाजार में आए.
विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि नियामकीय समयसीमाएं अकसर वित्तीय वर्ष के अंत में फाइलिंग पैटर्न को प्रभावित करती हैं, लेकिन यह मौजूदा उछाल का एकमात्र कारण यही नहीं है.
यह पाइपलाइन में शामिल होने वाली कंपनियों की बेहतर होती गुणवत्ता, प्राथमिक बाजार में मजबूत होते सेंटिमेंट का संकेत देती है.
एबीएस/
Categories व्यापारLeave a Comment Cancel reply
Comment
NameEmailWebsiteSave my name, email, and website in this browser for the next time I comment.

