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जमाखोरी के कारण बढ़े चीनी के दाम : जांच के दौरान मिलों में ज्यादा मिला भंडार, बिक्री पर बारीकी से नजर रख रही सरकार

जमाखोरी के कारण बढ़े चीनी के दाम : जांच के दौरान मिलों में ज्यादा मिला भंडार, बिक्री पर बारीकी से नजर रख रही सरकार

ई दिल्ली। सरकार ने शुक्रवार को दावा किया कि हाल में चीनी की कीमतों में तेज वृद्धि का कारण जमाखोरी थी और जांच के दौरान कई मिलों में घोषित स्टॉक से ज्यादा भंडार पाया गया। सरकार ने कहा है कि उसकी सक्रियता के कारण अब मिलों से मिलने वाली चीनी की कीमत 20% कम हो गई है और जल्द ही इसका असर खुदरा बाजार पर भी दिखने की उम्मीद है।

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं जन वितरण मंत्रालय ने कहा है कि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार है और पिछले दिनों कीमतों में देखी गई तेजी मुख्य रूप से जमाखोरी और सट्टेबाजी के कारण हुई थी। सरकार देश भर में चीनी की कीमतों, स्टॉक और बिक्री पर बारीकी से नजर रख रही है।

हर दो सप्ताह में चीनी आवंटन प्रक्रिया शुरू करने का फैसला

ऐसी समस्याओं को हल करने और यह पक्का करने के लिए कि चीनी समय पर बाजार तक पहुंचे, सरकार ने सितंबर से मौजूदा महीने के कोटा सिस्टम की जगह हर दो सप्ताह में चीनी आवंटन प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। मिलों को पहले सप्ताह में आवंटित चीनी का कम से कम 40 प्रतिशत बेचना होगा जबकि शेष चीनी दूसरे सप्ताह में बेचनी होगी। इससे सरकार को बाजार में उपलब्धता पर बेहतर नियंत्रण मिल सकेगा। अब बिक्री के सात दिन के अंदर चीनी भेजनी होगी।

मिलों ने कम आपूर्ति की

सरकार ने बताया कि कुछ मामलों में चीनी मिलें महीने के कोटे के तहत उन्हें दी गई मात्रा से कम चीनी बेच रही थीं। इस तरह के तरीकों से काफी भौतिक भंडार होने के बावजूद बाजार में आपूर्ति में रुकावट आती है। सरकार ने पाया है कि कुछ मामलों में मिलों द्वारा महीने की शुरुआत में बेची गयी चीनी को खरीददार महीने के आखिर में ही भेज या उठा रहे थे। इस तरीके से बाजार में बनावटी कमी पैदा हुई।

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