नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान बेंच ने मंगलवार से धार्मिक आस्था बनाम मौलिक अधिकार और सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश देने के मामले पर सुनवाई शुरु कर दी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली संविधान बेंच के समक्ष चल रही सुनवाई के समक्ष केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि सबरीमाला मंदिर में माहवारी से जुड़े आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर रोक धार्मिक आस्था और स्वायतता का मामला है।
केंद्र सरकार ने कोर्ट से इस प्रतिबंध को बरकरार रखने की मांग की है और कहा है कि ऐसे मामलों में न्यायिक समीक्षा की सीमा सीमित होनी चाहिए। आज सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि भारत ने हमेशा महिलाओं को न सिर्फ बराबरी दी है, बल्कि कई बार उन्हें ऊंचा स्थान दिया है। उन्होंने कहा कि कुछ हालिया फैसलों में पितृसत्ता और जेंडर स्टीरियोटाइप जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन ये अवधारणाएं भारतीय सभ्यता के मूल में नहीं रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे विचार बाहर से आए हैं और भारत की सांस्कृतिक परंपरा से मेल नहीं खाते हैं।

