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सहारनपुर की विलुप्त सिंधुली नदी को प्रशासन ने भागीरथी प्रयासों से किया पुनर्जीवित

सहारनपुर की विलुप्त सिंधुली नदी को प्रशासन ने भागीरथी प्रयासों से किया पुनर्जीवित

रिपोर्ट- सुरेंद्र सिंघल, विशेष संवाददाता,दैनिक संवाद, सहारनपुर मंडल,उप्र:।।

सहारनपुर। सहारनपुर की एक विलुप्त सिंधुली नदी को प्रशासन ने भागीरथी प्रयासों से पुनर्जीवित कर दिया है। 24 जून 2024 में यहां के जिलाधिकारी का कार्यभार संभालने के बाद संकल्पशील और विजनरी जिलाधिकारी मनीष बंसल ने इस नदी को जो 1960 के आसपास विलुप्त हो गई थी, पुनर्जीवित करने की योजना पर काम शुरू किया।

53.532 किलोमीटर लंबी यह नदी सहारनपुर की नकुड़ तहसील के बिसनपुरा गांव से शुरू होकर शामली जिले के ऊन ब्लाक के ख्वाजपुर गांव तक जाती है। जब यह नदी अपनी सचेत अवस्था में थी तब यह सहारनपुर में यमुना नदी के अतिरिक्त जल और कुछ बरसाती पानी को लेकर शामली में यमुना नदी में मिल जाती थी। यह नदी इलाके को बाढ़ से रोकती थी और खेतों की सिंचाई के काम आती थी। लेकिन 1962 के बाद यह नदी सूखती चली गई और इस पर जगह- जगह भराव कर लोगों ने कब्जे कर लिए, कुछ ने मकान बना लिए, कुछ लोग खेतीबाड़ी करने लगे।

राजस्व विभाग, ग्राम विकास विभाग, सिंचाई विभाग और प्रशासनिक अफसरों की देखरेख में इस नदी को पुनर्जीवित करने के युद्धस्तर पर प्रयास किए गए। मनरेगा के तहत नदी की भूमि से अवैध कब्जे हटाकर खुदाई कराई गई। सहारनपुर जनपद में यह नदी 28.926 किलोमीटर है और 24.606 किलोमीटर हिस्सा शामली जनपद में है। शामली जनपद में यह नदी पूरी तरह से ना तो विलुप्त हुई और ना ही उस पर सहारनपुर की तरह अवैध कब्जे किए गए।

जिलाधिकारी मनीष बंसल के निर्देश पर सीडीओ सुमित राजेश महाजन इस पूरी परियोजना को देख रहे हैं। प्रशासन ने पहले नदी की विलुप्त धारा को ड्रोन सर्वे और रिमोर्ट सेंसिंग के जरिए पहचानने का काम किया और अवैध अतिक्रमणों को हटाकर मनरेगा जरिए खुदाई कराई। यह काम करीब-करीब पूरा हो गया है। लखनौती क्षेत्र में 30-40 वर्ग गज जगह पर अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति चरण सिंह पुत्र कुरडी ने दो माह के अंदर एक कमरे का निर्माण करा लिया। वहां के लेखपाल मोहम्मद सलीम के मुताबिक जब राजस्व विभाग ने नायब तहसीलदार गंगोह धर्मेंद्र सक्सेना की अगुवाई में नदी क्षेत्र की निशानदेही कराई थी उस वक्त वहां कोई भी अवैध कब्जा मौजूद नहीं था। दो माह के भीतर चरण सिंह ने वहां एक कमरे का निर्माण करा लिया।

प्रशासनिक अफसरों ने इस अवैध कब्जे को हटाने के निर्देश दिए हैं। जल्द ही इस अवैध कब्जे को हटाकर यहां से नदी को उसके अगले मुकाम साकरोर की ओर पहुंचाया जाएगा। वहां भी साकरोर और शकरपुर के बीच में कुछ किसानों ने अवैध कब्जा कर गेहूं बोए हुए हैं। सीडीओ असलम परवेज ने बताया कि दो-चार दिन में गेहूं की फसल कटने के बाद इस स्थान पर भी जल्द नदी की खुदाई शुरू कराई जाएगी और हफ्ते-दस दिन के भीतर पूरा नदी क्षेत्र अपने पूर्व स्थिति में आ जाएगा।सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता ने बताया कि अब यह नदी यमुना नदी से जुड़ी हुई नहीं है। गांव किशनपुरपुरा में इसके उद्गम स्थल पर अर्द्धचंद्राकार आकृति का सूख तालाब स्थित है।

पहले इसमें भारी मात्रा में पानी भरा रहता था और यह नदी बरसाती नदी के रूप में काम करती थी। अभी भी इसका स्वरूप बरसाती नदी का रहेगा। यह अपने उद्गम स्थल के जलग्राही क्षेत्र से बरसाती पानी को ग्रहण कर शामली तक ले जाएगी। कुल मिलाकर इस नदी की खुदाई का काम अभी मुश्किल से आध-पौन किलोमीटर शेष रह गया है। करीब करीब सभी बाधाएं दूर हो चुकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस बरसात में यह नदी बरसाती नदी के तौर पर बहती दिखेगी।

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