देश में आठवीं तक निशुल्क अनिवार्य शिक्षा अधिनियम आरटीई की सुहानी तस्वीर, लेकिन उज्ज्वल पोर्टल की खामियों से हरियाणा में प्राथमिक शिक्षा की हकीकत कुछ और ही हालात बयां कर रही है। राइट टू एजुकेशन (आरटीई) के तहत हरियाणा सरकार ने ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद गरीबों और वंचित वर्ग के नर्सरी से प्रथम कक्षा तक के बच्चों के प्रवेश के लिए दूसरा राउंड शुरू किया था।
इसकी अंतिम तारीख 6 जुलाई थी। अमीरों व आम बच्चों के लिए इन प्राथमिक कक्षाओं में प्रवेश की कोई अंतिम तारीख नहीं होती। छठी से 12वीं तक में भी दाखिला 31 जुलाई तक होते हैं लेकिन पोर्टल और अधिसूचनाओं के मुताबिक गरीबों के बच्चों के लिए 6 जुलाई ही अंतिम तारीख थी। रिक्शा चलाने वाले, ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करने वाले गरीब अभिभावक अनिल, बिशंभर, रमेश, मंगतू ने बताया कि वे अनपढ़ हैं।
रोज सुबह 7 बजे ही मजदूरी के लिए घर से निकल जाते हैं। किसी ने प्राइवेट स्कूलों में दाखिले के लिए आरटीई के तहत निःशुल्क प्रवेश की बात बताई तो वे नजदीकी सीएससी सेंटर से फार्म भराने गए। उन्होंने बताया कि वहां सरकार के उज्ज्वल पोर्टल पर फार्म तो भरा गया, लेकिन फाइनल सब्मिट नहीं हो पाया। उसमें लोहारू कस्बे के एक बंद हो चुके स्कूल के अलावा किसी भी प्राइवेट स्कूल का नाम नहीं आ रहा था, जबकि इन स्कूलों के प्रबन्धकों ने बताया कि उनके यहां सीटें रिक्त थी।
विभाग का हेल्पलाइन हेल्पलाइन नंबर बंद आ रहा था। ईमेल का कोई जवाब नहीं आया। इस बारे में पोर्टल पर अंकित हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क साधा गया तो बंद पाया गया। वहीं बीईओ विजयप्रभा से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि उनकी संज्ञान में अभी यह मामला नहीं आया है। यदि ऐसा है तो वे उच्च अधिकारियों को लिखेंगी।
