हरियाणा अब केवल घरेलू औद्योगिक शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार के मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राव नरबीर सिंह ने संकेत दिया है कि राज्य सरकार अफ्रीकी बाजारों को नए अवसर के रूप में देख रही है और इसी रणनीति के तहत 5 मई से तंजानिया के दार-एस-सलाम में होने वाले 50वें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में सक्रिय भागीदारी करेगी।
इस दौरे को केवल एक औपचारिक प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि 'मार्केट एक्सपेंशन मिशन' के रूप में देखा जा रहा है, जहां हरियाणा अपना विशेष पैवेलियन लगाकर निवेश और निर्यात के नए रास्ते तलाशेगा। यह दौरा केवल निवेश आकर्षित करने का प्रयास नहीं है, बल्कि 'लोकल टू ग्लोबल' विजन की वास्तविक परीक्षा भी है। अगर यह पहल सफल रहती है, तो हरियाणा के कृषि उत्पाद, मशीनरी, दवाइयां और टेक्नोलॉजी सेवाएं सीधे अफ्रीकी बाजारों में अपनी जगह बना सकती हैं। सरकार का यह कदम संकेत देता है कि आने वाले समय में हरियाणा न केवल भारत के भीतर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क में भी एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकता है।
प्रदेश के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर ने बताया कि नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य ने पिछले दशक में निर्यात में लगभग 395 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। यह आंकड़ा केवल विकास का संकेत नहीं, बल्कि हरियाणा की बदलती आर्थिक पहचान का प्रतीक है। अब सरकार का लक्ष्य राज्य को मैन्युफैक्चरिंग बेस से आगे बढ़ाकर ग्लोबल एक्सपोर्ट हब बनाना है, जहां से उत्पाद सीधे अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचें।
एमएसएमई को मिलेगा ग्लोबल प्लेटफॉर्म : हरियाणा की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई सेक्टर की बड़ी भूमिका है, और अब इसे वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए एमएसएमई ग्लोबल इंडस्ट्रीज मैचिंग प्रोग्राम शुरू किया जा रहा है। इस पहल के तहत पहली बार रिवर्स बायर-सेलर मीट आयोजित होगी, जहां विदेशी खरीदार सीधे हरियाणा के उद्यमियों से जुड़ेंगे। इससे छोटे उद्योगों को भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का मौका मिलेगा।
तंजानिया क्यों है खास
अफ्रीकी देशों, खासकर तंजानिया को लेकर सरकार की रणनीति बेहद स्पष्ट है। यहां प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता, सस्ती खेती और तेजी से बढ़ता बाजार भारतीय कंपनियों के लिए बड़ा अवसर बन सकता है। इस सात दिवसीय दौरे में किसान, व्यापारी, आईटी और फार्मा सेक्टर के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो स्थानीय कंपनियों और संस्थाओं के साथ साझेदारी और समझौते करने की दिशा में काम करेंगे।
निर्यातकों के लिए बड़े फैसले
राव नरबीर सिंह ने बताया कि सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहलें शुरू की हैं। 80% से अधिक उत्पादन निर्यात करने वाली इकाइयों को विशेष पहचान दी गई है। एक्सपोर्ट बूस्टर सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है और फ्रेट सब्सिडी को 10 लाख से बढ़ाकर 30 लाख रुपये प्रति यूनिट प्रति वर्ष की गई है। इन फैसलों का सीधा असर लागत कम करने और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर पड़ेगा।
