मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि बाबा मक्खन शाह लुबाना और बाबा लक्खी शाह बंजारा त्याग, सेवा और बलिदान की अमर परंपरा के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि महापुरुष किसी एक समाज के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की साझा धरोहर हैं और नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री संत कबीर कुटीर में ‘संत-महापुरुष सम्मान एवं विचार प्रसार योजना’ के तहत आयोजित बाबा मक्खन शाह लुबाना और बाबा लक्खी शाह बंजारा के राज्य स्तरीय जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में समाज के प्रबुद्धजनों ने मुख्यमंत्री का सरोपा और स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया। इस अवसर पर बंजारा समाज के प्रतिनिधियों ने छह सूत्रीय मांगपत्र मुख्यमंत्री को सौंपा, जिस पर उन्होंने सभी मांगों को स्वीकार करने का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री ने पेहवा में बाबा मक्खन शाह लुबाना धर्मशाला के निर्माण के लिए 31 लाख रुपये तथा दतौली गांव में सामुदायिक केंद्र के निर्माण के लिए भी 31 लाख रुपये देने की घोषणा की। साथ ही बाबा मक्खन शाह लुबाना के नाम पर किसी सरकारी संस्थान का नाम रखने का भी आश्वासन दिया।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने बाबा लक्खी शाह बंजारा के ऐतिहासिक बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु तेग बहादुर के बलिदान के बाद उन्होंने अपने घर को अग्नि देकर गुरु साहिब का अंतिम संस्कार किया, जो आज भी प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने 1871 के क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के तहत बंजारा-लबाना समाज को अपराधी घोषित किया था, जिसे 31 अगस्त 1952 को समाप्त किया गया। इसलिए इस दिन को विमुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है।
उन्होंने लोगों से बाबा मक्खन शाह लुबाना और बाबा लक्खी शाह बंजारा के सेवा, समर्पण और बलिदान के आदर्शों को अपनाने तथा विकसित भारत के निर्माण में भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
समारोह में बंजारा समाज के पुरोहित हुकुम सिंह, सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक के़ मकरंद पांडुरंग, प्रदेशाध्यक्ष सूबेदार मेजर किशोरी लाल, डीएनटी बोर्ड चेयरमैन जसमेर सिंह बंजारा, मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती और विवेक कालिया, बाबा मक्खन शाह लुबाना भवन सोसायटी पेहवा के चेयरमैन मनजीत सिंह, वाइस चेयरमैन अवतार सिंह, रघुबीर सिंह मोरथली, खालसा कुरुक्षेत्र के सरपंच अमरीक सिंह, जिप चेयरमैन मक्खन सिंह तथा प्रदेशभर से आए लुबाना और बंजारा समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
