नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि टॉप ब्यूरोक्रेट्स को आपस में लड़ाकर मुख्यमंत्री अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं और चेस्टर हिल मामले में एसडीओ सोलन व तहसीलदार की उन जांच रिपोर्टों को अकारण खारिज किया गया, जिनमें धारा 118 के स्पष्ट उल्लंघन और अवैध निर्माण की बात कही गई थी। जयराम ठाकुर ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि जमीन मालिक की आय और निर्माण की लागत में भारी अंतर है तथा एक बाहरी कंपनी द्वारा लोन की किश्तें भरना हिमाचल के कानूनों का खुला उल्लंघन है, इसके बावजूद जिला उपायुक्त ने फाइल सचिवालय भेजकर अपने न्यायिक अधिकार क्षेत्र का उपयोग नहीं किया और सरकार ने संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर आरोपियों को लाभ पहुंचाया।
उन्होंने डंपिंग साइट के कारण प्राकृतिक जल स्रोतों के बंद होने और बिल्डिंग की ऊंचाई नियमों के विरुद्ध 25 से बढ़ाकर 35 मीटर करने पर भी कड़ा एेतराज जताया। दूसरी ओर, सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा के भीतर और बाहर भाजपा ने जो मुद्दे उठाए हैं, वे कांग्रेस के पतन के लिए पर्याप्त हैं और भविष्य में कांग्रेस की ऐसी दुर्दशा होगी जो प्रदेश के इतिहास में पहले कभी नहीं देखी गई।
