China AI Job Replacement: क्या कोई कंपनी अपने कर्मचारियों को निकालकर उनका काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सौंप सकती है? चीन की एक अदालत ने इसका जवाब स्पष्ट ‘नहीं’ में दिया है।
चीन के हांगझोऊ की इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि एआई के कारण इंसान का काम छिनने को ‘परिस्थितियों में बड़ा बदलाव’ नहीं माना जा सकता, जो कि चीन के लेबर कानून के तहत किसी भी वैध छंटनी के लिए जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (1 मई) से ठीक पहले 30 अप्रैल को आए इस फैसले ने ऑटोमेशन के दौर में नौकरी गंवाने के डर से जूझ रहे कर्मचारियों को एक सकारात्मक संदेश दिया है।
क्या था पूरा मामला?
झोउ (Zhou) नाम के एक कर्मचारी को उसकी टेक कंपनी ने नौकरी से निकाल दिया था। कंपनी ने उनके काम के बड़े हिस्से को एआई सिस्टम से ऑटोमेट कर दिया था। इसके बाद कंपनी ने झोउ का वेतन घटाकर 15,000 युआन प्रति माह करने और उन्हें एक निचले पद पर भेजने की कोशिश की। झोउ ने इसे अनुचित बताते हुए मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद कंपनी ने ‘ऑर्गेनाइजेशनल रीस्ट्रक्चरिंग’ और ‘स्टाफ की कम जरूरत’ का हवाला देते हुए उन्हें नौकरी से निकाल दिया और मुआवजे की पेशकश की। झोउ ने इस फैसले को मध्यस्थता (Arbitration) में चुनौती दी, जहां फैसला उनके पक्ष में आया और इस छंटनी को गैरकानूनी करार दिया गया।
कोर्ट ने कंपनी की दलीलें की खारिज
कंपनी ने आर्बिट्रेशन के फैसले के खिलाफ जिला अदालत और फिर हांगझोऊ की ऊपरी अदालत में अपील की, लेकिन उसे हर जगह हार का सामना करना पड़ा। अदालत ने स्पष्ट किया कि कंपनी यह साबित करने में विफल रही कि कर्मचारी द्वारा अपनी पुरानी भूमिका निभाना असंभव हो गया था या उसे दिया गया नया पद उचित था। अदालत के अनुसार, एआई तकनीक को अपनाना कंपनी की अपनी व्यावसायिक पसंद है और अपनी इस तकनीकी तरक्की का जोखिम वह कर्मचारियों पर नहीं डाल सकती।
पहले भी आ चुके हैं ऐसे फैसले
चीन में एआई के कारण होने वाली छंटनी का यह पहला विवाद नहीं है। इस फैसले ने पिछले साल बीजिंग में सामने आए एक ऐसे ही मामले की याद दिला दी है। उस मामले में एक मैप डेटा वर्कर की भूमिका को एआई से बदल दिया गया था। उस मामले में भी अदालतों ने स्पष्ट रूप से यह माना था कि केवल एआई द्वारा काम रिप्लेस किया जाना किसी को नौकरी से निकालने का वैध कारण नहीं हो सकता।
