Death of Indians Abroad : हर साल लाखों भारतीय बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर खाड़ी देशों का रुख करते हैं। इनमें हरियाणा के भी हजारों युवा शामिल हैं। लेकिन रोजगार और बेहतर कमाई का यह सपना कई परिवारों के लिए कभी-कभी हमेशा के लिए टूट जाता है।
संसद में पेश किए गए ताजा सरकारी आंकड़ों ने इसी कड़वी हकीकत को सामने रखा है।
वर्ष 2023 से 2025 के बीच सिर्फ सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में ही 15,439 भारतीय नागरिकों की मौत दर्ज हुई। इनमें बड़ी संख्या प्राकृतिक मौतों की है, लेकिन सैकड़ों लोगों ने कार्यस्थल हादसों में जान गंवाई, जबकि आत्महत्या और आपराधिक घटनाएं भी मौत का कारण बनीं।
यह जानकारी विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में हिसार के कांग्रेस सांसद जयप्रकाश 'जेपी' और सोनीपत के कांग्रेस सांसद सतपाल ब्रह्मचारी के संयुक्त सवाल के जवाब में दी। दोनों सांसदों ने विदेशों में भारतीयों की मौत, उनके कारणों, कामगारों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और पीड़ित परिवारों को मिलने वाली सरकारी सहायता पर विस्तृत जानकारी मांगी थी।
सऊदी सबसे ऊपर, यूएई दूसरे नंबर पर
विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक तीन वर्षों में सऊदी अरब में कुल 7,981 भारतीयों की मौत हुई। इनमें 6,376 प्राकृतिक मौतें, 182 कार्यस्थल दुर्घटनाएं, 354 आत्महत्याएं, 29 आपराधिक घटनाएं और 1,040 अन्य कारणों से हुई मौतें शामिल हैं। यूएई में इसी अवधि के दौरान 7,458 भारतीयों की मौत दर्ज की गई। इनमें 5,702 प्राकृतिक मौतें, 128 कार्यस्थल दुर्घटनाएं, 511 आत्महत्याएं, 25 अपराध और 1,092 अन्य कारणों से हुई मौतें शामिल हैं। अमेरिका इस सूची में तीसरे स्थान पर रहा, जहां 2,850 भारतीय नागरिकों की मौत हुई। इसके अलावा कुवैत, ओमान, कतर, मलेशिया, इटली, ब्रिटेन और जर्मनी में भी बड़ी संख्या में भारतीयों की मौत के मामले दर्ज किए गए।
हरियाणा के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये आंकड़े
हरियाणा के हजारों परिवारों की आर्थिक रीढ़ विदेशों, खासकर खाड़ी देशों में काम कर रहे युवाओं पर टिकी है। महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, झज्जर, भिवानी, हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, नूंह और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में युवा सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत और ओमान में रोजगार के लिए जाते हैं। ऐसे में विदेशों में भारतीयों की मौत के ये आंकड़े केवल राष्ट्रीय स्तर का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि हरियाणा के हजारों परिवारों की चिंता से भी जुड़े हुए हैं।
सांसदों ने सिर्फ मौत नहीं, सुरक्षा का सवाल भी उठाया
जयप्रकाश और सतपाल ब्रह्मचारी ने सरकार से पूछा कि विदेशों में भारतीय नागरिकों की मौत किन परिस्थितियों में हो रही है। उन्होंने कामगारों की कार्य परिस्थितियों, मानसिक तनाव, सामाजिक सुरक्षा, बीमा, कानूनी सहायता और किसी भारतीय की मौत होने पर उसके पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक स्वदेश लाने की व्यवस्था पर भी जवाब मांगा।
संकट में फंसे भारतीयों के लिए है यह व्यवस्था
विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों के माध्यम से 24 घंटे हेल्पलाइन, प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र, मदद पोर्टल, सीपी-ग्राम्स, ई-माइग्रेट, व्हाट्सएप और ई-मेल के जरिए शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं। जिन देशों में भारतीय कामगारों की संख्या अधिक है, वहां विशेष लेबर विंग भी तैनात हैं। जरूरतमंद भारतीयों को इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड के माध्यम से कानूनी सहायता, आर्थिक मदद, इलाज, अस्थायी आवास, हवाई यात्रा और पार्थिव शरीर को भारत भेजने तक की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
48 घंटे में पार्थिव शरीर भेजने का लक्ष्य
विदेश मंत्रालय के अनुसार ई-केयर क्लीयरेंस पोर्टल के जरिए विदेश में मृत भारतीय नागरिक के पार्थिव शरीर को भारत भेजने की अनुमति 48 घंटे के भीतर जारी करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके अलावा प्रवासी भारतीय बीमा योजना (पीबीबीवाई) के तहत ईसीआर श्रेणी के कामगारों को 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलता है।
महिला कामगारों के लिए अलग सुरक्षा कवच
संसद में यह भी बताया कि खाड़ी देशों और अन्य ईसीआर श्रेणी वाले देशों में जाने वाली महिला कामगारों की भर्ती केवल अधिकृत सरकारी एजेंसियों के माध्यम से कराई जाती है। उनके लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष निर्धारित की गई है, ताकि शोषण और मानव तस्करी जैसी आशंकाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
