नीट पेपर लीक विवाद को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में विद्यार्थियों के 36 दिन के आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार दोपहर अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
इसके साथ ही केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों के अन्य मांगें भी स्वीकार कर लीं। इसके बाद कॉजपा ने जंतर-मंतर पर 20 जून से चल रहा अपना प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की। इसके कुछ घंटे बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। उनकी जगह केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल दिखा। कॉजपा ने नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिजन को एक-एक करोड़ रुपये के मुआवजे और एफआईआर वापस लिए जाने की मांग की थी। प्रधान के इस्तीफे के बाद यहां कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में कॉजपा और सरकार के बीच बैठक हुई। इसमें बनी सहमति के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार नीट रद्द होने के बाद 'आत्महत्या' करने वाले छात्रों के परिवारों को नियमों के तहत सम्मानजनक मुआवजा देगी। सभी प्राथमिकी वापस ली जाएंगी। कॉजपा के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, पार्टी आंदोलन वापस लेने की घोषणा करती है। संगठन की मांगों का मसौदा सरकार के साथ साझा किया गया है, जिस पर मंगलवार तक लिखित गारंटी मिलेगी। कॉजपा प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि कॉजपा ने पांच-सूत्री मांग पत्र सौंपा है, जिसमें परीक्षा सुधारों की बात कही गई है। उस मांग पत्र को लेकर चार हफ्ते बाद सरकार के साथ दोबारा बातचीत की जाएगी।
यह व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं : प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान ने 'एक्स' पर अपने इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने लिखा कि पिछले 10 दिन के घटनाक्रम से उनका मन बेहद दुखी है और यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। प्रधान ने कहा, 'जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, उसका राष्ट्र-विरोधी ताकतें लाभ न उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर ध्यान केंद्रित करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है।'
विवाद में कुर्सी छोड़ने वाले मोदी सरकार के दूसरे मंत्री
प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में प्रधान सार्वजनिक विवाद के बाद इस्तीफा देने वाले दूसरे केंद्रीय मंत्री हैं। उनसे पहले एमजे अकबर ने मीटू आंदोलन के दौरान यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के बाद 2018 में विदेश राज्य मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।
} यह लोकतंत्र की जीत है, प्रत्यक्ष लोकतंत्र… जो सीधे सड़कों से निकला। यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। सीजेपी और देश की 'जेन जी' को बधाई, डर त्यागकर देश के हर कोने से एकजुट होकर आगे आने वाले सभी नागरिकों का धन्यवाद। -सोनम वांगचुक
फास्ट ट्रैक कोर्ट विशेष न्यायाधीश ने संभाला काम
सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और अन्य अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए गठित अदालत की विशेष न्यायाधीश ने शनिवार को कार्यभार संभाल लिया। सूत्रों ने बताया कि विशेष न्यायाधीश अनु ग्रोवर बलिगा ने राउज एवेन्यू जिला अदालत परिसर में विशेष रूप से गठित त्वरित अदालत का कार्यभार संभाला। अदालत से जुड़े सूत्रों ने बताया कि नीट-यूजी 2026 के प्रश्नपत्र लीक मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए 13 आरोपियों से संबंधित मुकदमे की सुनवाई इस अदालत में स्थानांतरित किए जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी की 23 जुलाई की उस घोषणा के बाद यह अधिसूचना जारी की गई, जिसमें उन्होंने कहा था कि त्वरित अदालतें स्थापित की जाएंगी।
कल पेश हो सकता है पेपर लीक
कानून में संशोधन विधेयक
लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधन करने वाला एक विधेयक सोमवार को संसद में पेश किए जाने की संभावना है। इसमें प्रश्नपत्र लीक से संबंधित अपराधों के लिए कारावास की अवधि को 10 साल तक और जुर्माने को 10 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। विधेयक को पेश किए जाने से पहले सदस्यों को वितरित की गयी इसकी प्रति के अनुसार, परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक या अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल की कैद और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। विधेयक के अनुसार, सभी जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होंगी।
छात्रों की जीत हुई, सरकार को हटाने का वक्त आ गया : राहुल गांधी
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों की जीत करार देते हुए कहा कि अब इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सभी छात्रों से माफी मांगनी चाहिए। छात्रों के खिलाफ बर्बरता के लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। राहुल ने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था को आरएसएस ने 'दीमक बनकर' खोखला कर दिया है। कांग्रेस नेता ने कहा, 'यह अतीत यानी नरेंद्र मोदी और आरएसएस तथा भारत के भविष्य के बीच की लड़ाई है। हमें पूरा विश्वास है कि भारत का भविष्य अतीत को हरा देगा।' राहुल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को छात्रों के खिलाफ हुई हिंसा के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि उन्होंने छात्रों पर गोली चलाने, घातक हथियारों तथा पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति दी। उधर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह देश के करोड़ों युवाओं, सत्य और साझा विपक्ष की जीत है तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'हठ' की हार है। खड़गे ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, 'भारत के छात्रों की गूंज आखिरकार अहंकारी सत्ता की दहलीज तक पहुंच गई।… अब बारी है मोदी जी द्वारा हमारी युवा पीढ़ी से माफी मांगने की और उन लोगों पर कठोर कार्रवाई करने की जिन्होंने युवाओं पर लाठी-डंडे-पैलेट गन चलवाए।' कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि देश के युवाओं व छात्रों ने यह लड़ाई बहादुरी से लड़ी और जीत हासिल की है। उन्हाेंने कहा कि पैलेट गन, आंसू गैस के इस्तेमाल के बावजूद छात्र नहीं झुके; सरकार को झुकना पड़ा।
लोकतंत्र की बड़ी जीत : केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लोकतंत्र की बड़ी जीत है और इसके लिए उन्होंने देशवासियों को बधाई दी। साथ ही उम्मीद जताई कि भविष्य में प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ शुरू हुआ अभियान अब रोजगार के मुद्दे तक पहुंचेगा और हर गलती के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
प्रधान के साथ मजबूती से खड़ी है भाजपा : नबीन
भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा, 'बड़े हितों को प्राथमिकता देते हुए, उनका (प्रधान) पद छोड़ने का फैसला सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा के उच्चतम मानकों को दर्शाता है। पार्टी इस फैसले में धर्मेंद्र प्रधान के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने देश के शिक्षा क्षेत्र में सुधार लाने और अहम राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सफलतापूर्वक लागू करने के साथ-साथ अन्य पहल में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।'
जंतर-मंतर पर पथराव में तीन पुलिस अधिकारी घायल
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के तुरंत बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के एक समूह द्वारा सुरक्षाकर्मियों पर कथित रूप से पथराव किए जाने से एक विशेष पुलिस आयुक्त समेत तीन पुलिस अधिकारी घायल हो गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुरक्षाबलों को स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा। पुलिसकर्मियों ने तुरंत प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेल दिया अौर थोड़े ही समय में स्थिति सामान्य हो गई।
पहले भी कई शिक्षा मंत्रियों ने किया है विरोध का सामना
भारी विरोध के बीच इस्तीफा देने वाले केंद्रीय शिक्षा मंत्री और भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान का मामला कोई पहला नहीं है। उनसे पहले मुरली मनोहर जोशी, अर्जुन सिंह, कपिल सिब्बल और स्मृति ईरानी भी ऐसे शिक्षा मंत्री रहे हैं जिन्हें विद्यार्थियों के विरोध का सामना करना पड़ा था।
वर्ष 1999 और 2004 के बीच तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्री मुरली मनोहर जोशी पर एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों का भगवाकरण करने का आरोप लगा था। उन्होंने इसके पीछे दलील दी थी कि हमारे यहां शिक्षा पूरी तरह से भारत केंद्रित नहीं है। वर्ष 2003 में रायबरेली की एक विशेष अदालत द्वारा बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में उनके और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय करने का निर्णय सुनाए जाने के बाद जोशी ने इस्तीफा दे दिया।
बाद में यूपीए के सत्ता में आने के बाद, कांग्रेस नेता अर्जुन सिंह एचआरडी मंत्री बने। उन्होंने 2006 में उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का वादा किया। इस कदम का एम्स के डॉक्टरों और आईआईटी छात्रों ने कड़ा विरोध किया। प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज भी हुआ।
ऐसे ही वर्ष 2013 में दिल्ली यूनिवर्सिटी ने चार साल का अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम शुरू किया। उस वक्त कपिल सिब्बल केंद्रीय मंत्री थे। विद्यार्थियों और शिक्षकों के समूहों ने इसका बड़े पैमाने पर विरोध किया। बाद में एनडीए सत्ता में आई। वर्ष 2015 में हैदराबाद यूनिवर्सिटी ने 26 साल के पीएचडी छात्र रोहित वेमुला का स्टाइपेंड (छात्रवृत्ति) बंद कर दिया। मुद्दे ने बहुत तूल पकड़ा। उस वक्त स्मृति ईरानी शिक्षा मंत्री थीं। बाद में वेमुला ने आत्महत्या कर ली। इससे पूरे देश में भारी आक्रोश फैल गया। जुलाई 2016 में ईरानी को कपड़ा मंत्रालय दे दिया गया।
पेपर हेरफेर छत्तीसगढ़ पीएससी अध्यक्ष ईडी की गिरफ्त में
रायपुर : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले में धनशोधन के आरोपों के तहत छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को शनिवार को यहां गिरफ्तार कर लिया। यह जांच सीजीपीएससी द्वारा वर्ष 2020 और 2021 में आयोजित राज्य सेवा परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों के कथित रूप से लीक होने और परीक्षा प्रक्रिया में कथित हेरफेर के आरोपों से संबंधित है। अधिकारियों ने दावा किया कि पूछताछ के दौरान सोनवानी के जवाब टालमटोल वाले रहे। धनशोधन की यह जांच सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई है। मामला नवंबर 2023 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को हराकर भाजपा के सत्ता में आने के बाद दर्ज किया गया था।
भय विहीन होनी चाहिए शांतिपूर्ण
प्रदर्शन की अनुमति : यूएन
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की इच्छा रखने वाले लोगों को बिना किसी उत्पीड़न, गिरफ्तारी या चोट के भय के ऐसा करने की अनुमति मिलनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, 'हम निश्चित रूप से नयी दिल्ली में हुए प्रदर्शनों से पूरी तरह अवगत हैं।
