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Digital Census 2026 : 1 अप्रैल से हर भारतीय की बनेगी 'ऑनलाइन कुंडली', इसी डेटा से तय होगा 2029 का चुनावी समीकरण

Digital Census 2026 : देश एक ऐसे ऐतिहासिक प्रशासनिक महा-अभियान की दहलीज पर खड़ा है, जो देश की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दिशा को हमेशा के लिए बदल देगा। करीब 150 वर्षों से चली आ रही कागजी जनगणना की पारंपरिक व्यवस्था को पीछे छोड़ते हुए भारत 1 अप्रैल 2026 से अपनी पहली ‘डिजिटल जनगणना’ (Digital Census) का शंखनाद करने जा रहा है।

गृह मंत्रालय और भारत के महापंजीयक (ORGI) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस बार न तो लंबे-चौड़े कागजी फॉर्म होंगे और न ही आंकड़ों के विश्लेषण में दशकों का इंतजार करना होगा। यह ‘डिजिटल इंडिया’ के विजन की वह आधारशिला है, जिस पर अगले 25 वर्षों के विकास का ढांचा खड़ा होगा।

कोरोना महामारी के कारण 2021 में जो जनगणना स्थगित हुई थी, वह अब अत्याधुनिक तकनीक, मोबाइल ऐप और क्लाउड सर्वर के साथ हमारे सामने है। यह जनगणना इसलिए भी क्रांतिकारी है क्योंकि इसके आंकड़े ही तय करेंगे कि 2029 के लोकसभा चुनाव में देश का राजनीतिक नक्शा कैसा होगा, सीटों का परिसीमन कैसे होगा और महिलाओं को मिलने वाला 33 प्रतिशत आरक्षण किस रूप में जमीन पर उतरेगा।

जनगणना का खाका : दो चरणों का महा-अभियान

जनगणना 2026 को दो मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक चरण का अपना विशिष्ट महत्व है:

चरण 1: मकान सूचीकरण और आवास गणना (1 अप्रैल – 30 सितंबर 2026)

यह जनगणना की पहली सीढ़ी है। इस चरण का मुख्य उद्देश्य देश के भौतिक ढांचे यानी घरों और वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का डेटा जुटाना है। इस दौरान गणनाकार (Enumerators) देश के हर गली-मोहल्ले में जाएंगे और हर मकान की डिजिटल मैपिंग करेंगे। इस चरण में मकानों की संख्या और उनकी स्थिति के आधार पर ही दूसरे चरण की योजना बनाई जाती है।

चरण 2: जनसंख्या गणना (फरवरी 2027)

यह वह चरण है जिसमें ‘व्यक्तियों’ की गिनती होगी। इसे ‘जनसंख्या गणना’ (Population Enumeration) कहा जाता है। इसमें देश के हर नागरिक की व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक कुंडली तैयार की जाएगी। फरवरी 2027 में होने वाली यह गणना ही देश की आधिकारिक जनसंख्या और जातिगत आंकड़ों का मुख्य स्रोत बनेगी।

Phase 1 के वो 34 सवाल : जो आपके घर के बारे में पूछे जाएंगे

 AI द्वारा निर्मित

पहले चरण (अप्रैल-सितंबर 2026) के दौरान गणनाकार आपसे कुल 34 सवाल पूछेंगे। इन सवालों को तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है। आइए जानते हैं क्या है ये सूची:

1. घर और परिवार का बुनियादी विवरण

  • मकान नंबर और जनगणना नंबर: आपके घर की विशिष्ट पहचान।
  • मकान की बनावट : दीवार, छत और फर्श में इस्तेमाल की गई सामग्री (पक्का या कच्चा मकान)।
  • मकान का उपयोग : क्या मकान केवल रहने के लिए है या वहां कोई व्यवसाय भी चलता है?
  • परिवार के मुखिया का विवरण : मुखिया का नाम और लिंग (अब पुरुष, महिला के साथ ‘ट्रांसजेंडर’ का भी स्पष्ट विकल्प है)।
  • परिवार के सदस्यों की संख्या : घर में रहने वाले कुल व्यक्तियों का विवरण।
  • अनुसूचित जाति/जनजाति : क्या परिवार का मुखिया एससी या एसटी वर्ग से संबंधित है?
  • स्वामित्व की स्थिति : क्या घर अपना है या किराए का?

2. आवास सुविधाएं और बुनियादी जरूरतें

  • कमरों की संख्या : घर में रहने के लिए कुल कितने कमरे उपलब्ध हैं?
  • पीने के पानी का स्रोत : क्या पानी घर के अंदर आता है या बाहर से लाना पड़ता है? स्रोत क्या है (नल, हैंडपंप, कुआं)?
  • बिजली कनेक्शन : क्या घर में बिजली की सुविधा उपलब्ध है?
  • शौचालय की सुविधा : शौचालय घर के अंदर है या नहीं? इसका प्रकार क्या है (फ्लश, पिट आदि)?
  • रसोई और ईंधन : क्या घर में अलग रसोई घर है? खाना पकाने के लिए किस ईंधन (एलपीजी, बिजली, लकड़ी) का उपयोग होता है?
  • निकासी व्यवस्था : गंदे पानी की निकासी के लिए बंद नाली है या खुली?

3. घरेलू संपत्ति और डिजिटल पहुंच

  • रेडियो/ट्रांजिस्टर : क्या घर में सूचना का यह पारंपरिक साधन है?
  • टेलीविजन : टीवी की उपलब्धता।
  • इंटरनेट कनेक्शन : क्या परिवार के पास सक्रिय इंटरनेट सुविधा है?
  • कंप्यूटर/लैपटॉप : क्या घर में शिक्षा या काम के लिए ये साधन मौजूद हैं?
  • टेलीफोन/मोबाइल : लैंडलाइन और मोबाइल फोन की संख्या।
  • वाहन : साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, कार, जीप या वैन की उपलब्धता।
  • बैंकिंग सुविधा : क्या परिवार का कोई सदस्य बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करता है?

Phase 2: जब दर्ज होगी आपकी व्यक्तिगत पहचान (फरवरी 2027)

 AI द्वारा निर्मित

दूसरे चरण में डेटा का गहराई से संकलन होगा। इसमें व्यक्तिगत स्तर पर जानकारी जुटाई जाएगी जो देश की नीति-निर्माण का आधार बनेगी। इसमें पूछे जाने वाले मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

1. जातिगत जनगणना (Caste Census)

2026 की जनगणना का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा यही है। पहली बार व्यापक स्तर पर डिजिटल रूप में सभी जातियों (ओबीसी और अन्य) की जानकारी जुटाई जाएगी। यह डेटा 2027-28 की राजनीति और आरक्षण की नई रूपरेखा तय करेगा।

2. शिक्षा और साक्षरता

प्रत्येक सदस्य की शैक्षणिक योग्यता, क्या वह अभी पढ़ाई कर रहा है या उसने स्कूल/कॉलेज छोड़ दिया है? यह डेटा देश की साक्षरता दर और कौशल विकास की जरूरतों को बताएगा।

3. भाषा और मातृभाषा

घर में बोली जाने वाली भाषा और अन्य किन भाषाओं का ज्ञान है? यह भारत की भाषाई विविधता का डिजिटल रिकॉर्ड होगा।

4. प्रवास (Migration)

व्यक्ति का जन्म स्थान कहाँ है और वह काम या शादी की वजह से यहाँ कब से रह रहा है? यह डेटा शहरों पर बढ़ते बोझ और गांवों से पलायन को समझने में मदद करेगा।

5. रोजगार और आर्थिक स्थिति

व्यक्ति क्या काम करता है? क्या वह साल के 6 महीने से ज्यादा काम करता है (Main Worker) या उससे कम (Marginal Worker)?

हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और चंडीगढ़ की तैयारी

दैनिक ट्रिब्यून के पाठकों के लिए यह जानना जरूरी है कि हमारे पड़ोसी राज्यों में इस महा-अभियान की जमीनी तैयारी क्या है :

हरियाणा : ‘परिवार पहचान पत्र’ (PPP) का मास्टर स्ट्रोक

हरियाणा सरकार ने इस जनगणना को अपनी महत्वाकांक्षी ‘परिवार पहचान पत्र’ योजना के साथ जोड़ दिया है।

  • सटीकता : राज्य के पास पहले से ही 70 लाख परिवारों का डिजिटल डेटा है। जनगणना के दौरान इस डेटा को ‘बेस’ मानकर क्रॉस-वेरिफाई किया जाएगा।
  • प्रशिक्षण : हरियाणा में लगभग 60,000 सरकारी कर्मचारियों (शिक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं) को टैबलेट चलाने और ‘सेंसस ऐप’ के उपयोग का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

पंजाब: एनआरआई और प्रवासी मजदूरों का गणित

पंजाब के लिए जनगणना का अर्थ सामाजिक और आर्थिक संतुलन को समझना है।

  • एनआरआई डेटा : पंजाब में बड़ी संख्या में घरों के मालिक विदेशों में हैं। उनके बंद पड़े घरों की गणना के लिए प्रशासन ने ‘प्रॉक्सि-डेटा’ (Proxy Data) और पड़ोसियों से जानकारी जुटाने की विशेष व्यवस्था की है।
  • प्रवासी मजदूर : लुधियाना, जालंधर और अमृतसर जैसे औद्योगिक शहरों में लाखों प्रवासी मजदूर रहते हैं। इस बार उनकी सटीक गिनती पंजाब के बजट आवंटन में बड़ी भूमिका निभाएगी।

हिमाचल प्रदेश : दुर्गम भौगोलिक चुनौतियां

हिमाचल में जनगणना का काम किसी मिशन से कम नहीं है।

  • ऑफलाइन मोड एप : लाहौल-स्पीति, किन्नौर और चंबा के पांगी-भरमौर जैसे इलाकों में इंटरनेट की समस्या को देखते हुए ‘ऑफलाइन सिंकिंग’ वाले ऐप दिए गए हैं।
  • विशेष समय सीमा : बर्फबारी के कारण हिमाचल के ‘स्नो-बाउंड’ क्षेत्रों में जनगणना की तारीखें देश के बाकी हिस्सों से अलग (अक्टूबर-नवंबर के बजाय गर्मियों में) रखी गई हैं ताकि कोई भी नागरिक छूट न जाए।

चंडीगढ़: ‘स्मार्ट जनगणना’ का रोल मॉडल

चंडीगढ़ को ‘जनगणना हब’ के रूप में विकसित किया गया है।

  • सेल्फ एन्यूमरेशन : चंडीगढ़ में डिजिटल साक्षरता दर 90% से अधिक है, इसलिए प्रशासन यहाँ के नागरिकों को ‘स्वयं गणना’ (Self Enumeration) के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
  • कंट्रोल रूम : सेक्टर-17 स्थित मुख्यालय से पूरे उत्तर भारत की गतिविधियों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है।

परिसीमन और राजनीति: क्यों अहम है यह डेटा ?

यह समझना जरूरी है कि 2026 की जनगणना केवल सांख्यिकी नहीं है, यह सत्ता की चाबी है।

  1. सीटों का पुनर्निर्धारण : 84वें संविधान संशोधन के अनुसार, लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या 2026 के बाद की जनगणना के आधार पर बदली जानी है। अनुमान है कि लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 800+ हो सकती हैं।
  2. महिला आरक्षण : ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लागू करने के लिए जनगणना पहली अनिवार्य शर्त है। जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण मिल पाएगा।
  3. विकास का बजट : वित्त आयोग राज्यों को बजट का आवंटन इसी जनसंख्या डेटा के आधार पर करता है।

डेटा सुरक्षा: आपकी गोपनीयता का क्या ?

डिजिटल मोड होने के कारण डेटा प्राइवेसी को लेकर चिंताएं स्वाभाविक हैं। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि:

  • एन्क्रिप्शन : जनगणना ऐप का डेटा 256-बिट एन्क्रिप्शन के साथ सुरक्षित रहेगा।
  • गोपनीयता : जनगणना अधिनियम 1948 के तहत, यह डेटा किसी भी अदालत में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता और न ही किसी दूसरी एजेंसी को व्यक्तिगत पहचान के साथ दिया जाएगा।
  • क्लाउड स्टोरेज : सारा डेटा ‘भारत इंटरनल क्लाउड’ पर स्टोर होगा, जो पूरी तरह स्वदेशी और सुरक्षित है।

डिजिटल जनगणना 2026 एक ऐसे भारत की तस्वीर पेश करेगी जो तकनीक के दम पर विकसित होना चाहता है। 1 अप्रैल से शुरू होने वाला यह महा-अभियान हर भारतीय की पहचान को डिजिटल युग में एक नई मजबूती प्रदान करेगा। हरियाणा की डिजिटल तत्परता, पंजाब का सामाजिक ताना-बाना और हिमाचल की भौगोलिक दृढ़ता मिलकर इस अभियान को सफल बनाएंगे।

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