भारतीय टेलीविजन पर लोकप्रिय क्विज शो 'कौन बनेगा करोड़पति' अपने 18वें सीजन में नए तेवर के साथ लौट रहा है। इस बार का थीम 'सोचना पड़ेगा' यकीनी बनाएगा कि कार्यक्रम में केवल तथ्य व रट्टा आधारित ज्ञान नहीं, बल्कि प्रतिभागी की समझ, विश्लेषण व चिंतन की क्षमता भी परखी जा सके।
एआई और त्वरित सूचना के दौर में यह बदलाव केबीसी को नई पीढ़ी की रुचि मुताबिक ढालने वाला साबित हो सकता है।
तीन जुलाई 2000 को स्टार प्लस टेलिविजन चैनल पर 'कौन बनेगा करोड़पति' कार्यक्रम का पहला एपीसोड प्रसारित हुआ था। तब से आजतक पिछले 17 सीजनों में इस कार्यक्रम के 1454 एपीसोड प्रसारित हो चुके हैं। किसी एक एपीसोड का आकर्षण उसके पहले वाले से कमतर नहीं रहा। करीब 26 सालों से जारी 'कौन बनेगा करोड़पति' भारतीय टेलिविजन इतिहास का सबसे विश्वसनीय और लोकप्रिय क्विज शो बना हुआ है। आगामी 9 अगस्त 2026 से इसका 18वां सीजन शुरु हो रहा है, जो अब तक के सीजनों से थोड़ा हटकर होगा। इस सीजन की थीम है- 'सोचना पड़ेगा'।
अध्ययन व सोच से निकलेंगे सवाल
दरअसल एआई के इस दौर में जब किसी भी सवाल का जवाब पलक झपकते मिल सकता हो, उस समय केबीसी को अपनी रणनीति में इस तरह का बदलाव लाना ही होगा कि किसी भी सवाल का जवाब पलक झपकते ही, किसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से न दिया जा सके। इसलिए शायद इस बार के सवाल तथ्यों की बजाय विषय के संबंध में गहरे अध्ययन और सोच से निकलेंगे।
ज्ञान और मनोरंजन का संगम
बहरहाल केबीसी का हर सीजन पिछले से किसी न किसी मामले में थोड़ा अलग होता रहा है। लेकिन चाहे थीम में बदलाव हुआ हो, चाहे प्रजेंटेशन का ढंग बदला हो, इस कार्यक्रम की लोकप्रियता पर असर नहीं हुआ। सवाल है आखिर केबीसी की इस लोकप्रियता की वजह क्या है? दरअसल , केबीसी हमारे ज्ञान और सपनों का संगम है। जहां बाकी टीवी कार्यक्रमों को लेकर दिल में यह भावना रहती है कि इन गढ़ी गयी कहानियों से हम अपना वक्त बर्बाद कर रहे हैं, वहीं केबीसी के बारे में दिमाग में आता है कि हम एक ऐसा कार्यक्रम देख रहे हैं, जो मनोरंजन करने के साथ ही हमारा ज्ञान भी बढ़ा रहा है। ज्ञान को लेकर समाज के अवचेतन में सम्मान की भावना है, इसलिए 'कौन बनेगा करोड़पति' पहली ही सीढ़ी में अपने दर्शकों का सम्मान अर्जित कर लेता है। क्योंकि हर कोई ज्ञान हासिल करना चाहता है। केबीसी की सफलता के पीछे यह नैतिक धारणा सबसे बड़ी चीज है।
आमजन की उम्मीदें से जुड़ा शो
केबीसी के संबंध में दूसरी बात यह है कि इस कार्यक्रम का हमारी महत्वाकांक्षाओं के साथ मजबूत जुड़ाव है। छोटे शहरों व गांवों के आम लोगों तक को यह कार्यक्रम अपने साथ जोड़ता है। हर किसी में उम्मीद बनाये रखता है कि कोई भी अपनी मेहनत और ज्ञान के बूते करोड़पति बन सकता है। इसके अलावा इस कार्यक्रम के होस्ट अमिताभ बच्चन हैं, जिनकी 50 साल की फिल्मी प्रोफाइल विश्वसनीय है।
प्रस्तुति का आत्मीय अंदाज़
अकारण नहीं है कि अब तक के प्रसारित 17 सीजनों में सिर्फ एक सीजन (साल 2007) शाहरुख खान ने इस कार्यक्रम को होस्ट किया था बाकी सभी सीजनों के होस्ट अमिताभ बच्चन ही रहे हैं। ऐसे में केबीसी अमिताभ बच्चन के साथ जुड़ गया कार्यक्रम है। उनका इस कार्यक्रम को प्रस्तुत करने का जो आत्मीय ढंग है, वह सम्मानजनक और सहज हास्य लिए होता है, जो कि दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ता है। वहीं इस कार्यक्रम में अब तक लगभग हर वर्ग का हो चुका प्रतिनिधित्व भी है। किसान, शिक्षक, डॉक्टर, गृहिणि, छात्र, पुलिसकर्मी यानी समाज के हर वर्ग के लोग अब तक इस कार्यक्रम से जुड़े रहे हैं।
बदलावों का आकर्षण
केबीसी में हर बार इस तरह के बदलाव किये जाते हैं, जिससे पिछले सीजन के मुकाबले मौजूदा सीजन अलग, जरा बेहतर और आसान भी लगता है। केबीसी ने पिछले 17 सीजनों में कई तरह के नियम बदले हैं, कई तरह की सहूलियतें बढ़ायी हैं। लाइफलाइन, पुरस्कार राशि, खेल के नियम, सुपर सवाल जैसे बदलाव दर्शकों को आकर्षित करते रहे हैं।
अब सोचकर देना होगा जवाब
इस बार का बदलाव यानी 18वें सीजन में सवालों की प्रकृति को इस तरह का किया जाना कि एक झटके में और फिक्स जवाब न हों बल्कि जवाब सोचना पड़े, वह भी नये समय की चुनौतियों को देखते हुए काफी लोकप्रिय साबित हो सकता है। क्योंकि आज चैटजीपीटी, गूगल और एआई टूल्स की वजह से जानकारियां सैकेंडों में मिल रही हैं। तथ्य आधारित सवाल ज्यादा चुनौती नहीं पैदा करेंगे। शायद इसलिए केबीसी ने सवालों की प्रकृति को थोड़ा सोचने वाला बनाया है। यह भी कि आज का दर्शक ज्ञान को केवल तथ्य या नतीजे के रूप में नहीं चाहता बल्कि वह उस प्रक्रिया को भी जानना चाहता है, जिससे वह उत्तर बना होता है। इसलिए निर्माता ने अब जवाब रटकर देने की जगह समझकर उत्तर देने की रणनीति अपनाने का फैसला किया है। दरअसल 'कौन बनेगा करोड़पति' यानी केबीसी की लोकप्रियता के एक नहीं बल्कि कई आयाम हैं।
-इ.रि.सें.
