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हार को गुरु बनाना

क दिन सेल्यूकस ने अपने दरबारियों से कहा, 'कल मैं तुम्हें अपना सबसे कीमती खजाना दिखाऊंगा।' अगले दिन सभा खचाखच भरी हुई थी। सबको उम्मीद थी कि खजाने में हीरे, जवाहरात या सोना होगा। लेकिन जब संदूक खोला गया, तो उसमें केवल एक टूटी हुई तलवार रखी थी।

दरबार में फुसफुसाहट शुरू हो गई। सेल्यूकस ने तलवार उठाई और कहा, 'यह वही तलवार है जो उस युद्ध में टूटी थी जहां मैं हार गया था।' एक दरबारी हंसते हुए बोला, 'महाराज, हार की निशानी भी कोई खजाना होती है?' सेल्यूकस मुस्कुराया और बोला, 'यह मेरी सबसे बड़ी संपत्ति है।

जीत ने मुझे गर्व करना सिखाया था, लेकिन इस हार ने मुझे स्वयं को पहचानना सिखाया। यदि यह तलवार न टूटती, तो मेरा अहंकार कभी न टूटता। जीवन में असफलता शर्म की बात नहीं है। शर्म की बात है उससे कुछ न सीखना। कई बार टूटी हुई तलवार ही हमें अजेय बनाती है। याद रखो, जो व्यक्ति अपनी हार को छुपाता है, वह उससे कुछ नहीं सीखता। लेकिन जो उसे अपना गुरु बना लेता है, उसकी अगली जीत को कोई नहीं रोक सकता।'

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