हरियाणा भाजपा की नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता द्वारा शनिवार देर शाम घोषित प्रदेश संगठन की पहली सूची में जहां कई नए चेहरों को जिम्मेदारी देकर बदलाव का संदेश दिया है, वहीं अहीरवाल की अनदेखी ने नई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
हरियाणा में भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ माने जाने वाले महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी जिलों को इस सूची में ना के बराबर स्थान मिलने से स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम लोगों में भी चर्चा होने लगी है।
पार्टी के 36 महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों वाली इस सूची में महेंद्रगढ़ जिले से एक भी नेता को जगह नहीं मिली, जबकि रेवाड़ी से केवल विधायक लक्ष्मण यादव को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। प्रदेश उपाध्यक्ष, महामंत्री, मंत्री, कोषाध्यक्ष, कार्यालय प्रबंधन, प्रवक्ता, मीडिया, आईटी, मोर्चा अध्यक्ष और विभिन्न प्रकोष्ठों के प्रभारियों जैसी अहम जिम्मेदारियों में अहीरवाल की हिस्सेदारी केवल एक पद तक सीमित रहना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
प्रदेश कार्यालय द्वारा जारी सूची के अनुसार नई टीम में 8 प्रदेश उपाध्यक्ष, 3 प्रदेश महामंत्री, 9 प्रदेश मंत्री, 4 कोषाध्यक्ष एवं कार्यालय प्रबंधन से जुड़े पद, 4 प्रवक्ता एवं मीडिया-आईटी पद, 6 मोर्चा अध्यक्ष और 2 प्रकोष्ठ प्रभारी शामिल हैं। इन नियुक्तियों में फतेहाबाद, रोहतक, गुरुग्राम, झज्जर, हिसार, सोनीपत, अंबाला, यमुनानगर, जींद, पलवल, पंचकूला और कुरुक्षेत्र जैसे जिलों को एक से अधिक प्रतिनिधित्व मिला है।
विशेष रूप से फतेहाबाद को उपाध्यक्ष, महामंत्री सहित कई अहम जिम्मेदारियां देकर विशेष महत्व दिया गया है। इसके विपरीत अहीरवाल जैसे भाजपा के गढ़ को केवल एक पद मिलना राजनीतिक दृष्टि से अनदेखी माना जा रहा है।
भाजपा का सबसे मजबूत क्षेत्र रहा है अहीरवाल
अहीरवाल क्षेत्र लंबे समय से भाजपा की चुनावी ताकत का केंद्र माना जाता है। 2014 से ही लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी को यहां लगातार मजबूत जनसमर्थन मिलता रहा है। गौरतलब है कि प्रदेश में भाजपा की तीन बार सरकार बनाने में सबसे अहम योगदान अहीरवाल क्षेत्र का रहा है। ऐसे में संगठन की सूची में इस क्षेत्र की नगण्य भागीदारी ने स्वाभाविक रूप से स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा छेड़ दी है कि आखिर संगठनात्मक प्रतिनिधित्व में इस बार अहीरवाल पीछे क्यों रह गया ?
जिला में भाजपा कार्यकर्ताओं का एक वर्ग मानता है कि चुनावों में लगातार मजबूत प्रदर्शन करने वाले क्षेत्र को संगठन में भी उसी अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। वहीं पार्टी से जुड़े कई नेता इसे सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया बताते हुए अंतिम तस्वीर आने का इंतजार करने की बात कह रहे हैं।
