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हरियाणा में 33 मोबाइल फूड लैब का नेटवर्क, घर-घर पहुंचेगी खाद्य सुरक्षा जांच; अब आपके मोहल्ले में होगी दूध-घी की जांच

Haryana Food Inspection : अब खाद्य पदार्थों की शुद्धता जांचने के लिए लोगों को सरकारी प्रयोगशालाओं के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। हरियाणा सरकार ‘डोरस्टेप फूड टेस्टिंग’ मॉडल लागू करने जा रही है, जिसके तहत मोबाइल प्रयोगशालाएं सीधे मोहल्लों, बाजारों और गांवों तक पहुंचेंगी।

महज 20 रुपये प्रति नमूना देकर लोग दूध, घी, मिठाई, तेल, मसाले और अन्य खाद्य पदार्थों की वैज्ञानिक जांच मौके पर ही करा सकेंगे।

इसके लिए सरकार बंद पड़ी पांच फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स लैब को दोबारा शुरू कर रही है, जबकि एनसीआर क्षेत्र के लिए 28 नई मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब खरीदने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ़ सुमिता मिश्रा के अनुसार यह पहल खाद्य सुरक्षा को प्रयोगशालाओं से निकालकर सीधे आम नागरिकों तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे मिलावट की शिकायतों पर त्वरित जांच संभव होगी और उपभोक्ताओं का भरोसा भी बढ़ेगा।

बाजार, स्कूल, मेले… जहां जरूरत, वहीं पहुंचेगी लैब

मोबाइल प्रयोगशालाएं बाजारों, रिहायशी कॉलोनियों, स्कूलों, कॉलेजों, मेलों, त्योहारों और विशेष निरीक्षण अभियानों में तैनात की जाएंगी। मौके पर ही प्राथमिक वैज्ञानिक जांच होने से संदिग्ध खाद्य पदार्थों की तुरंत पहचान हो सकेगी और जरूरत पड़ने पर आगे की कानूनी कार्रवाई भी तेज होगी।

33 मोबाइल लैब का बनेगा नेटवर्क

फिलहाल पंचकूला, करनाल, हिसार, सोनीपत और रेवाड़ी में मौजूद पांच मोबाइल लैब तकनीकी खराबी के कारण बंद हैं। सरकार इनका पूर्ण नवीनीकरण कर रही है, जिसमें वैज्ञानिक उपकरणों, विद्युत प्रणाली, प्लंबिंग, वर्कस्टेशन और वाहन की मरम्मत शामिल है। इस पर करीब 33.79 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचएमएससीएल) के माध्यम से एनसीआर के लिए 28 नई मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब खरीदी जा रही हैं। वित्तीय सहायता एनसीआर प्लानिंग बोर्ड उपलब्ध करा रहा है। दोनों चरण पूरे होने के बाद प्रदेश में 33 मोबाइल लैब का नेटवर्क तैयार हो जाएगा।

त्योहारों पर मिलावट के खिलाफ अभियान तेज

तीज और रक्षाबंधन से पहले एफडीए ने विशेष अभियान चलाकर 16 जुलाई से 2 अगस्त के बीच घेवर और फिरनी के 122 नमूने लिए। अब तक जांचे गए 18 नमूनों में तीन निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे, जबकि शेष नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार है।

‘देसी घी’ का दावा भी जांच के दायरे में

त्योहारों के दौरान ‘शुद्ध देसी घी’ के नाम पर बिक रहे उत्पादों की सत्यता भी वैज्ञानिक कसौटी पर परखी जा रही है। ऐसे चुनिंदा नमूनों को एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में भेजा गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उपभोक्ताओं को भ्रामक दावों के आधार पर उत्पाद न बेचे जाएं।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Dainik Tribune Hindi