Haryana Cyber Crime : साइबर अपराध पर कार्रवाई के मामले में हरियाणा ने केवल गिरफ्तारियों और ऑनलाइन सामग्री हटाने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि साइबर ठगी के शिकार लोगों का पैसा वापस दिलाने में भी राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान बनाई है।
मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम) के जरिए राज्य ने साइबर ठगी के मामलों में 31 प्रतिशत धनराशि वापस कराई है, जबकि राष्ट्रीय औसत महज 3.85 प्रतिशत है। इसी अवधि में राज्य ने 14 हजार से अधिक फर्जी ऑनलाइन सामग्री हटाई, 3,947 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया और तकनीक आधारित जांच व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कई नए कदम उठाए। इन उपलब्धियों की समीक्षा सोमवार को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई बैठक में की गई।
पीड़ितों का पैसा लौटाने पर सबसे ज्यादा जोर
बैठक में बताया गया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के तहत हरियाणा का प्रदर्शन देश के अग्रणी राज्यों में रहा। राज्य में 7,316 मामलों में 2,241 रिस्टोरेशन आदेश जारी कर 31 प्रतिशत राशि पीड़ितों को वापस दिलाई गई। इसके मुकाबले देशभर में 1.79 लाख से अधिक मामलों में केवल 3.85 प्रतिशत धन वापसी हो सकी। अधिकारियों का कहना है कि बैंकों के साथ तेज समन्वय और त्वरित कार्रवाई से यह सफलता मिली है।
फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया कंटेंट पर बड़ी कार्रवाई
साइबर अपराध रोकने के लिए केवल अपराधियों पर ही नहीं, बल्कि उनके डिजिटल नेटवर्क पर भी कार्रवाई तेज की गई है। जनवरी से जून 2026 के बीच सहयोग पोर्टल के माध्यम से 14,139 अवैध ऑनलाइन सामग्री हटाई गई, जबकि पूरे वर्ष 2025 में यह संख्या 5,169 थी। हटाई गई सामग्री में फिशिंग वेबसाइट, फर्जी विज्ञापन, सोशल मीडिया पर धोखाधड़ी से जुड़े पोस्ट, फर्जी गूगल विज्ञापन और बिना अनुमति साझा की गई निजी आपत्तिजनक सामग्री शामिल रही।
नूंह पर लगातार शिकंजा, हजारों मोबाइल नंबर ब्लॉक
साइबर अपराध के हॉटस्पॉट माने जाने वाले नूंह में जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच पुलिस ने 473 एफआईआर दर्ज कर 927 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। इस दौरान 751 मोबाइल फोन और 1,442 सिम कार्ड जब्त किए गए। साथ ही खुफिया विश्लेषण के आधार पर 43,354 मोबाइल नंबर और उनसे जुड़े 5,007 आईएमईआई ब्लॉक कर संगठित साइबर गिरोहों की गतिविधियों पर अंकुश लगाया गया।
एआई, ई-जीरो एफआईआर और नए साइबर सेल से बढ़ेगी क्षमता
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बैठक में राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने एआई आधारित निगरानी, तकनीक आधारित पुलिसिंग, विभिन्न एजेंसियों के बेहतर समन्वय, अभियोजन और पीड़ित सहायता तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया। पुलिस अधीक्षक (साइबर) मयंक गुप्ता ने बताया कि पंचकूला स्थित राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र में अब एआई इंटीग्रेशन सेल, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग यूनिट, क्रिएटिव अवेयरनेस यूनिट, ओसीडब्ल्यूसी यूनिट और सीक्रेट सेल जैसी नई इकाइयां स्थापित की गई हैं। भविष्य में डार्क वेब जांच, वर्चुअल डिजिटल एसेट, अनुसंधान एवं विकास और नीति निर्माण से जुड़े विशेष प्रकोष्ठ भी स्थापित किए जाएंगे।
ई-जीरो एफआईआर से तेज होगी जांच
25 जून 2026 से राज्य में ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था लागू कर दी गई है। अब राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर एक लाख रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज होते ही वह स्वतः संबंधित साइबर पुलिस थाने में इलेक्ट्रॉनिक जीरो एफआईआर के रूप में पहुंच जाती है। इससे मामला दर्ज करने और जांच शुरू करने में लगने वाला समय काफी कम हुआ है।
साइबर जांच में बढ़ी विशेषज्ञता
राज्य में वर्तमान में 675 पुलिस कर्मी साइबर जांच में तैनात हैं। जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच 9,100 से अधिक पुलिस कर्मियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से विशेष प्रशिक्षण दिया गया। दो अधिकारी साइबर कमांडो के रूप में प्रशिक्षित हो चुके हैं, जबकि 12 अन्य अगले चरण के प्रशिक्षण के लिए चयनित हैं।
शिकायतों के निपटान और जनजागरूकता में भी बेहतर प्रदर्शन
बैठक में बताया गया कि फ्रीज बैंक खातों से संबंधित 533 शिकायतों में से 410 का निपटान किया जा चुका है और सभी मामलों को 15 दिन की समय सीमा में निपटाने की व्यवस्था बनाई गई है। वहीं, समन्वय पोर्टल पर दूसरे राज्यों से प्राप्त 8,872 अनुरोधों में से 8,625 का निस्तारण कर हरियाणा ने 97 प्रतिशत से अधिक दक्षता हासिल की है। साइबर अपराध से बचाव के लिए जनवरी से जून 2026 के बीच राज्यभर में 1,322 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से करीब 3.14 लाख लोगों को साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के तरीकों की जानकारी दी गई।
