ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में की गई आंशिक नाकेबंदी के बीच सुरक्षित समुद्री परिवहन सुनिश्चित करने के लिए ब्रिटेन में आज हुए लगभग 30 देशों के शिखर सम्मेलन में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भाग लिया।
इस नाकेबंदी से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। मिसरी ने डिजिटल माध्यम से चर्चा में भाग लेते हुए क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन मार्गों की सुरक्षा पर नई दिल्ली का रुख स्पष्ट किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जहां तक भारत का सवाल है, आप भली-भांति जानते हैं कि हम स्वतंत्र और खुले वाणिज्यिक परिवहन एवं अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप समुद्री सुरक्षा के पक्षधर हैं। हम होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने की अपनी प्राथमिकता पर कायम हैं।
ईरान द्वारा फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित संकरे होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग अवरुद्ध कर दिए जाने के बाद वैश्विक तेल व गैस की कीमतों में उछाल आया है। इस जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल और एलएनजी का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होकर गुजरता है। पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा खरीद का एक प्रमुख स्रोत रहा है। जायसवाल ने कहा कि ब्रिटेन ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर वार्ता के लिए भारत सहित कई देशों को आमंत्रित किया था और मिसरी ने इसमें भाग लिया था।
उन्होंने कहा कि हम ईरान व अन्य देशों के संपर्क में हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि एलपीजी और एलएनजी सहित उत्पादों को ले जाने वाले हमारे जहाजों के लिए निर्बाध व सुरक्षित पारगमन कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है। पिछले कुछ दिनों में हुई बातचीत के बाद भारतीय ध्वज वाले छह जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार करने में सक्षम हुए हैं। हम इस मामले पर संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क में हैं। नई दिल्ली पश्चिम एशिया संघर्ष से संबंधित सभी घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों के आवागमन में व्यवधान को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ रही हैं और कई प्रमुख शक्तियां जलमार्ग को पूरी तरह से खोलने के लिए दबाव डाल रही हैं। ईरान ने अपने मित्र देशों के जहाजों को जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दे दी है।
