IAF Counter-UAS : आधुनिक युद्ध में ड्रोन सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हो चुके हैं। छोटे आकार, कम लागत और सटीक हमला करने की क्षमता के कारण इनका इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे बदलते सुरक्षा परिदृश्य में भारतीय वायुसेना (IAF) राजस्थान में ‘एक्सरसाइज रोटर क्लैप-III’ आयोजित कर रही है।
इसका उद्देश्य हेलीकॉप्टरों के जरिए दुश्मन के ड्रोन का पता लगाने, उनका पीछा करने और उन्हें निष्क्रिय करने से जुड़ी परिचालन रणनीतियों का परीक्षण करना है।
वायुसेना के अनुसार, इस अभ्यास में हेलीकॉप्टर इकाइयों को उभरते हवाई खतरों के खिलाफ परिचालन अवधारणाओं को परखने के लिए एक साथ लाया गया है। अभ्यास के दौरान मिसाइलों और रॉकेटों की लाइव फायरिंग भी की जा रही है।
किन हेलीकॉप्टरों की हो रही है तैनाती?
अभ्यास में AH-64 अपाचे, Mi-25/35, स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) प्रचंड, चिनूक, Mi-17 और ध्रुव जैसे हेलीकॉप्टर हिस्सा ले रहे हैं। इनमें अटैक हेलीकॉप्टरों के साथ ट्रांसपोर्ट और यूटिलिटी हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं, ताकि विभिन्न परिस्थितियों में संयुक्त अभियान की क्षमता का आकलन किया जा सके।
क्या है Counter-UAS?
Counter-Unmanned Aerial System (C-UAS) ऐसी प्रणाली और रणनीति है, जिसके जरिए दुश्मन के ड्रोन की पहचान, निगरानी और उन्हें निष्क्रिय किया जाता है।
इसके लिए कई स्तरों पर तकनीकों का उपयोग किया जाता है-
- रडार और रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) डिटेक्टर से ड्रोन का पता लगाना।
- इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड सेंसर से निगरानी करना।
- जैमिंग और स्पूफिंग के जरिए ड्रोन के संचार को बाधित करना।
- जरूरत पड़ने पर गन, मिसाइल, लेजर या इंटरसेप्टर ड्रोन से उन्हें नष्ट करना।
ड्रोन से खतरा क्यों बढ़ रहा है?
हाल के वर्षों में ड्रोन का इस्तेमाल केवल निगरानी तक सीमित नहीं रहा। अब इनका उपयोग हमलों, हथियार और गोला-बारूद पहुंचाने तथा सैन्य अभियानों में बड़े पैमाने पर होने लगा है। राज्य और गैर-राज्य दोनों तरह के तत्व ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। यही वजह है कि दुनिया भर की सेनाएं काउंटर-ड्रोन तकनीक पर तेजी से निवेश कर रही हैं।
भारतीय सशस्त्र बल भी आक्रामक, रक्षात्मक और लॉजिस्टिक अभियानों में विभिन्न प्रकार के ड्रोन का उपयोग कर रहे हैं। साथ ही स्वदेशी ड्रोन और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के विकास पर भी तेजी से काम चल रहा है।
हेलीकॉप्टर क्यों हैं महत्वपूर्ण?
काउंटर-UAS से लैस हेलीकॉप्टर जमीन आधारित वायु रक्षा प्रणाली की सीमाओं को काफी हद तक दूर कर सकते हैं। इन्हें सीमावर्ती या दुर्गम क्षेत्रों में तेजी से तैनात किया जा सकता है और इन्हें रनवे की आवश्यकता भी नहीं होती। कम ऊंचाई पर उड़ने वाले छोटे ड्रोन के खिलाफ ये अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं।
AI आधारित ‘ड्रोन हंटर’ की तैयारी
रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय वायुसेना भविष्य में कुछ हेलीकॉप्टरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित रडार, जैमर और माइक्रो-मिसाइलों से लैस करने की योजना पर काम कर रही है। इनका उद्देश्य छोटे और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन का तेजी से पता लगाकर उन्हें हवा में ही निष्क्रिय करना होगा।
इसके अलावा भारतीय सशस्त्र बल कामिकाजे ड्रोन और लॉयटरिंग म्यूनिशन जैसी स्वदेशी प्रणालियों के विकास पर भी काम कर रहे हैं, ताकि भविष्य के युद्धक्षेत्र में ड्रोन आधारित खतरों का प्रभावी जवाब दिया जा सके।
एक नजर में
- अभ्यास: एक्सरसाइज रोटर क्लैप-III
- स्थान: राजस्थान
- उद्देश्य: हेलीकॉप्टर आधारित काउंटर-ड्रोन क्षमता का परीक्षण
- प्रमुख प्लेटफॉर्म: अपाचे, प्रचंड, Mi-25/35, चिनूक, Mi-17 और ध्रुव
- मुख्य गतिविधि: मिसाइल और रॉकेट की लाइव फायरिंग
