जीरकपुर में लगातार बढ़ती ट्रैफिक समस्या के बीच लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जीरकपुर-पंचकूला बाईपास परियोजना पर होने वाली सुनवाई से पहले भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने वैकल्पिक रूटों के अध्ययन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
माना जा रहा है कि एनएचएआई अदालत से अतिरिक्त समय मांगकर किसी विशेषज्ञ तकनीकी संस्था से नया सर्वे भी करा सकती है।
जानकारी के अनुसार, शहर के करीब 18 संवेदनशील ट्रैफिक प्वाइंट पर केवल 15 कर्मी तैनात हैं, जबकि आवश्यकता लगभग 40 कर्मचारियों की है। रात 8 बजे के बाद ट्रैफिक स्टाफ नहीं होने से स्थिति और गंभीर हो जाती है।
सिंहपुरा चौक, कोहिनूर ढाबा मोड़ और मैकडोनाल्ड चौक जैसे प्रमुख स्थानों पर ट्रैफिक सिग्नलों की कमी, वन-वे नियमों की अनदेखी, सडक़ पर जलभराव और दोबारा होने वाले अतिक्रमण जाम की मुख्य वजह बने हुए हैं। कई बार एंबुलेंस भी जाम में फंस जाती हैं, जिससे लोगों की चिंता बढ़ रही है। करीब 1,878 करोड़ रुपये की लागत वाले ज़ीरकपुर-पंचकूला बाईपास प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरण संबंधी सवाल भी उठे हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि मौजूदा प्रस्तावित रूट से चार हजार से अधिक पेड़ों की कटाई हो सकती है। इसी कारण हाईकोर्ट ने एनएचएआई को सभी संभावित वैकल्पिक मार्गों का गंभीरता से अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं। इस बीच केंद्र सरकार द्वारा 1,463.95 करोड़ रुपये की लागत से ट्राइसिटी रिंग रोड परियोजना को मंजूरी मिलने से भी लोगों की उम्मीदें बढ़ी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाईपास और रिंग रोड परियोजनाएं समय पर पूरी हो जाती हैं तो ज़ीरकपुर के ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही चंडीगढ़, पंचकूला, मोहाली तथा हिमाचल प्रदेश की ओर जाने वाला यातायात भी अधिक सुगम और सुरक्षित हो सकेगा।
