वर्ष 1924 के ओलंपिक में विश्व के खिलाड़ी अपने खेलों से दर्शकों को प्रभावित कर रहे थे। मिश्रित युगल टेनिस स्पर्धा के लिए भारत की एक खिलाड़ी मैदान में उतरने वाली थीं। निर्धारित समय पर मैच प्रारंभ हुआ।
मिश्रित युगल के लिए जब भारत की खिलाड़ी टेनिस कोर्ट पर पहुंची तो पूरी दुनिया के दर्शक दांतों तले अंगुली दबा उठे। वह खिलाड़ी कोई और नहीं बल्कि टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा के बड़े पुत्र सर दोराबजी टाटा की पत्नी मेहरबाई टाटा थीं। साड़ी में उनके खेल को देखकर विदेशी मीडिया और दर्शक हैरान थे। साड़ी में भी वे तेज सर्विस और अपनी चपलता से खेल को होशियारी से खेल रही थीं।
उन दिनों टेनिस जैसे खेल में भारतीय महिला खिलाड़ी कम थीं। इस खेल में भाग लेकर जहां उन्होंने पारंपरिक रूढ़ि को तोड़ा, वहीं साड़ी में टेनिस खेलकर भारतीय संस्कृति की अनूठी मिसाल प्रस्तुत की। उन्होंने कई टेनिस प्रतियोगिताओं में साड़ी पहनकर ही जीत हासिल की और पूरी दुनिया के सामने यह मिसाल रखी कि आधुनिक खेल खेलने के लिए अपनी जड़ों और पारंपरिक पहनावे को छोड़ना अनिवार्य नहीं है। खेल जगत के अलावा उन्होंने समाज सेवा भी की। उन्होंने बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । आज वे भारत की महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं।
