गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा है कि कोई भी एक हार जीवन की अंतिम हार नहीं होती। स्वयं को स्वयं से उठाओ, रास्ते बहुत हैं, आकाश खुला है। गीता जीवन के इसी संदेश के साथ क्षमताओं का विकास करती है और व्यक्ति को अंदर से सक्षम बनाती है।
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सौजन्य से सक्षम युवा, समर्थ भारत: गीता का दिव्य मार्गदर्शन विषय पर आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम को बतौर मुख्य वक्ता एवं मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे।
विश्वविद्यालय के जेसी बोस सेमिनार हॉल नं. 1 में हुए इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने की। इस अवसर पर गुरु जम्भेश्वर जी महाराज धार्मिक अध्ययन संस्थान के अध्यक्ष प्रो. किशना राम बिश्नोई तथा विश्वविद्यालय की प्रथम महिला डा. वंदना बिश्नोई भी उपस्थित रहे।
गीता मनीषी ने कहा कि भारत में क्षमताओं की कमी नहीं है। मानव, खनिज, बौद्धिक, भौतिक तथा आर्थिक संसाधन सभी दृष्टि से भारत अग्रणी है। आवश्यकता केवल यह है कि भारत का युवा संकल्पित हो, खुद को सक्षम बनाए। न केवल सक्षम बनाए बल्कि स्वामी विवेकानंद और अर्जुन जैसे आदर्शों को समक्ष रखते हुए वैसा ही बनने का प्रयास करें।
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने अपने संबोधन में कहा कि गुजविप्रौवि आगामी सत्र से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (एनईपी-2020) के तहत गीता ज्ञान संस्थान कुरुक्षेत्र के संयुक्त तत्वाधान में इंटीग्रेटेड बीए-एमए भगवद्गीता कोर्स आरंभ करेगा। गुरु जम्भेश्वर जी महाराज धार्मिक अध्ययन संस्थान व जीओ गीता के संयुक्त तत्वाधान में पूर्व में भगवद्गीता डिप्लोमा ऑनलाइन कोर्स प्रारम्भ है। उसका विस्तार देते हुए यह पाठ्यक्रम संचालित किया जाना प्रस्तावित है।
इस अवसर पर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज द्वारा इंटीग्रेटेड बीए-एमए भगवद्गीता कोर्स का ब्रॉशर जारी किया गया तथा गुजविप्रौवि की शोध पत्रिका समराथल धारा के नए अंक का विमोचन किया गया। धन्यवाद संबोधन गुरु जम्भेश्वर जी महाराज धार्मिक अध्ययन संस्थान के अध्यक्ष प्रो. किशना राम बिश्नोई ने किया। मंच संचालन डा. गीतू धवन ने किया।
