Lipulekh Pass Dispute : विदेश मंत्रालय ने उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से दशकों से आयोजित होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल की आपत्ति को रविवार को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि क्षेत्रीय दावों का ऐसा ”एकतरफा कृत्रिम विस्तार” अस्वीकार्य है।
नेपाल ने रविवार को भारत और चीन द्वारा लिपुलेख दर्रे के रास्ते आगामी कैलाश मानसरोवर यात्रा आयोजित करने की योजना पर आपत्ति जताई और दावा किया कि यह उसका क्षेत्र है।
नेपाल ने कहा कि तीर्थयात्रा के मार्ग को अंतिम रूप देने से पहले उससे परामर्श नहीं किया गया। नेपाल की इस आपत्ति के बाद भारत की कड़ी प्रतिक्रिया आई है। विदेश मंत्रालय ने 30 अप्रैल को घोषणा की थी कि वार्षिक कैलाश मानसरोवर यात्रा इस वर्ष जून से अगस्त तक दो मार्गों – उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रा और सिक्किम में नाथू ला दर्रा – के रास्ते होगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ”इस संबंध में भारत का रुख हमेशा एक जैसा और स्पष्ट रहा है। लिपुलेख दर्रा 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक प्रमुख मार्ग रहा है और इस मार्ग से यात्रा दशकों से होती रही है।”
उन्होंने कहा, ”यह कोई नया घटनाक्रम नहीं है। क्षेत्रीय दावों के संबंध में, भारत लगातार यह कहता रहा है कि ऐसे दावे न तो न्यायसंगत हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों एवं साक्ष्यों पर आधारित हैं।” जायसवाल ने कहा कि क्षेत्रीय दावों का इस तरह का ”एकतरफा कृत्रिम विस्तार अस्वीकार्य” है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत द्विपक्षीय संबंधों के सभी मुद्दों पर नेपाल के साथ ”रचनात्मक वार्ता” के लिए तैयार है, जिसमें लंबित सीमा मुद्दों का संवाद और कूटनीति के माध्यम से समाधान भी शामिल है।
